मुंबई, थिएटर से अभिनय की शुरुआत करने वाले अतुल कुलकर्णी ने हिंदी समेत कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया और हे राम व चांदनी बार के लिए दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।
Atul Kulkarni Birthday Special: अभिनेता अतुल कुलकर्णी का जन्म 10 सितंबर 1965 को महाराष्ट्र के बेलगाम अब कर्नाटक में हुआ था। अतुल कुलकर्णी आज अपना 61वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका बचपन एक साधारण माहौल में बीता। शुरू में उन्होंने इंजीनियरिंग पढ़ाई के लिए पुणे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन यह राह उन्हें रास नहीं आई। बचपन से ही कला और नाटकों की ओर उनका झुकाव था।
अतुल कुलकर्णी ने पढ़ाई छोड़कर थिएटर का रास्ता चुना और यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। स्कूल के दिनों से ही अतुल नाट्य प्रतियोगिताओं में भाग लेते थे। 1989 से 1992 तक उन्होंने महाराष्ट्र राज्य नाट्य स्पर्धा में लगातार कई पुरस्कार जीते। इस दौरान उन्होंने अभिनय और निर्देशन दोनों में अपनी प्रतिभा दिखाई। कॉलेज के दिनों में वे नाट्य आराधना नामक सोलापुर स्थित एक थियेटर ग्रुप से जुड़े।
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से शुरुआत
1995 में अतुल कुलकर्णी ने नई दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। यहीं उनकी मुलाकात गीताांजलि कुलकर्णी से हुई, जो बाद में उनकी पत्नी बनीं और खुद एक सफल थिएटर कलाकार हैं। एनएसडी से निकलने के बाद अतुल ने गंभीरता से फिल्मों और नाटकों में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई।
हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा में सफर
अतुल कुलकर्णी उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और यहां तक कि अंग्रेजी फिल्मों में भी बेहतरीन काम किया। ‘हे राम’ और ‘चांदनी बार’ जैसी फिल्मों में उनके प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वहीं ‘रंग दे बसंती’ और ‘खाकी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया।
अतुल कुलकर्णी के एनजीओ कार्य
अभिनय के साथ-साथ अतुल कुलकर्णी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। वो क्वेस्ट एजुकेशन सपोर्ट ट्रस्ट नाम की संस्था के अध्यक्ष हैं, जो वंचित बच्चों को शिक्षा देने का काम करती है। इसके अलावा, वो महाराष्ट्र के सतारा जिले में 24 एकड़ बंजर जमीन को हरियाली में बदलने जैसे पर्यावर्णीय प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े रहे हैं।
राष्ट्रीय पुरस्कार और उपलब्धियां
अतुल कुलकर्णी को दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। साल 2000 में फिल्म ‘हे राम’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार और साल 2001 में फिल्म ‘चांदनी बार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का अवॉर्ड। इन उपलब्धियों ने उन्हें न सिर्फ एक अभिनेता के रूप में बल्कि एक कलाकार के रूप में भी अलग पहचान दिलाई।
