कर्नाटक में शिवकुमार के 100 दिन के शासन पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

बेंगलुरु, (वार्ता) कर्नाटक में कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार गुरुवार को मुख्यमंत्री पद पर 100 दिन पूरे होने के साथ ही राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बाद के राजनीतिक दौर शुरुआती परीक्षा की अवधि में प्रवेश करने वाले हैं।

सत्तारूढ़ कांग्रेस जहां सरकार में निरंतरता और उसके कामकाज को सामने रखने की तैयारी कर रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यह सवाल उठाने की तैयारी में है कि क्या नेतृत्व में बदलाव के साथ शासन व्यवस्था में भी कोई बदलाव आया है।

श्री शिवकुमार इस अवसर पर विधान सौध में एक कार्यक्रम आयोजित कर 100 दिन पूरे होने का जश्न मनायेंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन करने के लिए श्री सिद्दारमैया को आमंत्रित किया गया है। नेतृत्व परिवर्तन के बाद कांग्रेस एकता का संदेश देने की कोशिश कर रही है और इसी लिहाज से श्री सिद्दारमैया की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कार्यक्रम में सरकार की पांच गारंटी योजनाओं के क्रियान्वयन, बुनियादी ढांचे से जुड़ी पहलों, नागरिक सेवाओं और शासन के अगले चरण के लिए सरकार की प्राथमिकताओं को प्रमुखता से सामने रखे जाने की उम्मीद है।

श्री शिवकुमार के लिए हालांकि यह अवसर केवल औपचारिक उपलब्धि का कार्यक्रम नहीं है। श्री सिद्दारमैया से मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद यह उन्हें अपनी अलग राजनीतिक पहचान और प्रभाव स्थापित करने का अवसर भी देता है। साथ ही, वह यह दिखाना चाहेंगे कि नेतृत्व परिवर्तन के बाद सरकार के कामकाज का अपना अलग एजेंडा है।

सरकार की ओर से शिकायतों के समाधान और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गयी पहलों के अलावा बुनियादी ढांचे और शहरी परिवहन से जुड़ी परियोजनाओं को भी प्रमुखता से बताया जाने की उम्मीद है। किसानों, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े नये ऐलान भी किये जाने की संभावना है।

भाजपा ने सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर को राजनीतिक लेखा-जोखा के रूप में पेश करने की कोशिश की है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने प्रस्तावित कार्यक्रम को 100 दिन का आरोपपत्र बताया है। उन्होंने मंत्रिमंडल में महिलाओं के प्रतिनिधित्व, भर्ती से जुड़े विवादों, सूखा राहत, कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान, बेंगलुरु की नागरिक समस्याओं और बिदादी टाउनशिप के मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने सरकार को ”यू-टर्न सरकार” बताया है। उन्होंने ऐसे फैसलों का हवाला दिया जिन्हें बाद में वापस लिया गया या उनमें बदलाव किया गया। इनमें कर्नाटक सरकार पार्क्स (संरक्षण) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन भी शामिल है। दोनों दलों के अलग-अलग दावों ने सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर को बड़ा राजनीतिक महत्व दे दिया है। कांग्रेस यह साबित करना चाहती है कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद शासन व्यवस्था में निरंतरता बनी हुई है। वहीं भाजपा यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद सरकार कोई ठोस परिणाम देने में विफल रही है।

श्री शिवकुमार ने कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद श्री सिद्दारमैया का स्थान लेते हुए तीन जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसलिए 100 दिन का यह कार्यक्रम इस बात का शुरुआती संकेत भी देगा कि मुख्यमंत्री निरंतरता और बदलाव के बीच किस तरह संतुलन बनाना चाहते हैं। उन्हें कांग्रेस सरकार की राजनीतिक विरासत को बनाए रखते हुए अपनी प्राथमिकताओं और नेतृत्व की अपनी शैली स्थापित करनी होगी।

इस कार्यक्रम में श्री सिद्दारमैया की मौजूदगी कांग्रेस के एकता के संदेश को और मजबूत कर सकती है। श्री शिवकुमार के लिए राजनीतिक परीक्षा यह होगी कि वह इस निरंतरता को अपनी अलग शासन व्यवस्था के रूप में लोगों के सामने किस तरह पेश करते हैं।

भाजपा के लिए गुरुवार को 100 दिन पूरे होने का अवसर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा से आगे बढ़कर सरकार के जमीनी प्रदर्शन को मुद्दा बनाने का अवसर है। इस तरह पहले 100 दिन कर्नाटक की राजनीति में एक नये दौर की शुरुआत का संकेत देते हैं। इस दौर में श्री शिवकुमार को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पकड़ और अधिकार स्थापित करना होगा, जबकि विपक्ष यह परखने की कोशिश करेगा कि सिद्दारमैया के बाद बनी सरकार लगातार राजनीतिक चुनौती का सामना कर पाने में सक्षम है या नहीं।

 

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