सतना: शहर में बीते एक सप्ताह से गहराया पेयजल संकट अब प्रशासन के नियंत्रण से बाहर होता नजर आ रहा है. सात दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम या नया प्रयोग नहीं कर सका है. स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये के निजी ठेके पर शहर में पानी का जिम्मा संभाल रही कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी जनता को बदबूदार और मटमैला पानी सप्लाई कर रही है. दूषित पानी पीने को मजबूर वार्डवासियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है और पूरे शहर में भारी आक्रोश पनपने लगा है.
कंपनी की लापरवाही इस कदर बढ़ गई है कि उसे प्रशासनिक चेतावनियों का भी कोई डर नहीं रह गया है.बीते दिनों महापौर ने कंपनी को आड़े हाथों लेते हुए दो दिन के भीतर पानी की गुणवत्ता सुधारने का सख्त अल्टीमेटम दिया था, लेकिन यह समयसीमा बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और महापौर की चेतावनी पूरी तरह बेअसर साबित हुई है.
पेयजल संकट को देखते हुए नगर निगम आयुक्त शेर सिंह मीना ने भी स्वयं मोर्चा संभालते हुए वाटर फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया था. निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि पानी की गुणवत्ता को तुरंत दुरुस्त कर शहर में साफ पानी की सप्लाई की जाए, लेकिन धरातल पर इस निरीक्षण का भी कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है.करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट के बावजूद शहर की जनता बूंद-बूंद शुद्ध पानी के लिए तरस रही है और घरों में लगातार बदबूदार पानी पहुंच रहा है
