इंदौर:डेली कॉलेज ओल्ड डेलियन एसोसिएशन (ओडीए) के नाम पर 10 मई को आयोजित तथाकथित एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (ईओजीएम) को लेकर अब इसकी वैधानिकता और प्रतिनिधित्व पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. बैठक की प्रक्रिया, उपस्थिति और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर ओल्ड डेलियन समुदाय में व्यापक चर्चा और असहमति सामने आई है.
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंदौर में 4500 से अधिक ओल्ड डेलियन्स हैं, जबकि उक्त बैठक में वास्तविक उपस्थिति करीब 188 लोगों के आसपास रही. यह आंकड़ा मौके पर मौजूद तस्वीरों और उपस्थिति के आकलन के आधार पर सामने आया है. दूसरी ओर, 200 से अधिक ओल्ड डेलियन्स द्वारा रजिस्ट्रार कार्यालय को ईमेल भेजकर इस ईओजीएम को असंवैधानिक और प्रक्रिया-विरुद्ध बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई है. जानकारी के मुताबिक, ओडीए की एग्जीक्यूटिव कमेटी के लगभग 50 सदस्य भी इस बैठक में शामिल नहीं हुए. कई वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि वे किसी भी वैध और संविधान सम्मत ईओजीएम के पक्षधर हैं, लेकिन ऐसी बैठक का समर्थन नहीं कर सकते जिसे निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना बुलाया गया हो.
क्लॉज 9 की व्याख्या को लेकर विवाद
पूरा विवाद ओडीए संविधान की क्लॉज 9 की व्याख्या को लेकर केंद्रित है. आपत्ति जताने वाले सदस्यों का कहना है कि इस क्लॉज को चुनिंदा तरीके से प्रस्तुत कर भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है. उनके अनुसार, क्लॉज में प्रयुक्त ‘एंड’ शब्द यह स्पष्ट करता है कि पूरी प्रक्रिया एक संयुक्त संवैधानिक ढांचे के तहत संचालित होनी चाहिए, न कि किसी एक पदाधिकारी के एकतरफा अधिकार के रूप में.
क्लॉज 9 के तहत निम्न प्रमुख शर्तों का उल्लेख बताया गया है—
100 सदस्यों की लिखित रिक्वीसिशन आवश्यक होना,
रिक्वीसिसन के साथ जनरल मीटिंग द्वारा निर्धारित नॉन-रिफंडेबल राशि जमा करना, तथा पूरी प्रक्रिया का संगठनात्मक और सचिवीय व्यवस्था के तहत संचालित होना, संवैधानिक विश्लेषण में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि किसी एक पदाधिकारी को स्वतंत्र रूप से ईओजीएम बुलाने का पूर्ण अधिकार होता, तो फिर रिक्वीसिशन, भुगतान और प्रक्रिया संबंधी शर्तों का उल्लेख संविधान में करने की आवश्यकता नहीं रहती।
कई ओल्ड डेलियन्स ने इसे ‘सिलेक्टिव रीडिंग’ का मामला बताते हुए कहा कि क्लॉज के केवल सुविधाजनक हिस्सों को प्रचारित किया जा रहा है, जबकि पूरी संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी की जा रही है.
प्रक्रिया को लेकर भी उठे सवाल
जारी दस्तावेजों और आपत्तियों में यह भी कहा गया है कि—
ओडीए एक्जीक्यूटिव कमेटी को औपचारिक रूप से विश्वास में नहीं लिया गया, जनरल मीटिंग द्वारा निर्धारित भुगतान प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया,
और बैठक को एकतरफा तरीके से आयोजित किया गया. इस पूरे घटनाक्रम के बाद समुदाय के कई सदस्यों ने कहा कि संस्था से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भावनात्मक अपील, अधूरी जानकारी और सोशल मीडिया आधारित नैरेटिव के बजाय तथ्य, प्रक्रिया और संविधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
संस्था की साख को लेकर चिंता
कई वरिष्ठ ओल्ड डेलियन्स ने चिंता जताई कि लगातार विवाद, सार्वजनिक बयानबाजी और भ्रम की स्थिति से 155 वर्ष पुरानी इस प्रतिष्ठित संस्था की छवि प्रभावित हो रही है. उनका कहना है कि डेली कॉलेज केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि एक विरासत है, और किसी भी पक्ष को व्यक्तिगत या चुनावी हितों के लिए इसकी साख को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. समुदाय के कई जिम्मेदार सदस्यों ने मांग की है कि भविष्य में यदि कोई ईओजीएम आयोजित की जाती है, तो वह पूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया, पारदर्शिता और सभी सदस्यों की सहभागिता के साथ हो, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी या संस्थागत जटिलता से बचा जा सके
