मुंबई। आखिर दुनिया में ऐसा क्या हो रहा है कि कीमती धातुओं की कीमतें लगातार चर्चा में बनी हुई हैं सोना हो या चांदी… दोनों की कीमतों पर इस वक्त सिर्फ निवेशकों की नहीं, बल्कि आम भारतीय की भी नजर है। 8 सितंबर 2026 को भारतीय बाजार में सोने और चांदी के दाम में फिर तेजी देखने को मिली। लेकिन सवाल है कि आखिर इनकी कीमतों पर इतना दबाव क्यों है?
दरअसल, दुनिया में बढ़ता तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और करीब 100 डॉलर तक पहुंचता कच्चा तेल… इन सबने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे समय में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए इसकी मांग पर असर पड़ता है।
लेकिन भारत के लिए कहानी सिर्फ इतनी नहीं है
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा सोना और चांदी आयात करके पूरा करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ती है या रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारत के लिए इन धातुओं की आयात लागत भी बढ़ सकती है।
और अभी रुपया भी दबाव में है। 8 सितंबर को रुपया करीब 94.82 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ, जबकि कच्चा तेल 100 डॉलर के करीब पहुंच रहा है। यानी एक तरफ महंगा तेल भारत का आयात बिल बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ महंगा सोना-चांदी भी विदेशी मुद्रा की जरूरत बढ़ा सकते हैं।
इसीलिए सरकार भी कीमती धातुओं के आयात पर नजर रख रही है। मई 2026 में भारत ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर करीब 15 फीसदी किया था, जिसका असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ा।
इसका सीधा असर किस पर पड़ता है?
आम ग्राहक पर। शादी-ब्याह के लिए सोना खरीदना हो, निवेश करना हो या चांदी की खरीदारी—कीमत बढ़ने का मतलब है ज्यादा रकम खर्च करना। यानी सोने-चांदी की चमक सिर्फ बाजार की कहानी नहीं है…
इसके पीछे डॉलर, रुपया, तेल, आयात और दुनिया का तनाव – सबका कनेक्शन है अब बड़ा सवाल यही है- अगर वैश्विक तनाव और रुपये पर दबाव जारी रहा, तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजार में सोना-चांदी कितने महंगे होंगे?
