
सौसर, लोधीखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम खेरीतायगांव में अवैध रूप से कॉलोनी काटकर प्लॉट बेचने के गंभीर मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। बिना किसी वैधानिक अनुमति के कृषि भूमि को छोटे-छोटे आवासीय भूखंडों में बांटकर बेचने के आरोप में तीन कॉलोनाइजरों के विरुद्ध संबंधित थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई है।
*जांच में खुली नियमों की अनदेखी की पोल-*
प्रशासन को मिली शिकायत और दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। ग्राम पंचायत खेरीतायगांव स्थित भूमि पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अथवा सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत ले-आउट और वैध अनुमतियां लिए बिना ही आवासीय कॉलोनी काटी जा रही थी। नियमों को ताक पर रखकर कॉलोनाइजरों ने यहां कई लोगों को प्लॉटों की अनधिकृत रजिस्ट्री व बिक्री कर दी।
*कानून के दायरे में आया मामला-*
मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के तहत बिना अनुमति कृषि या अन्य भूमि पर कॉलोनी काटना अवैध कॉलोनाइजेशन की श्रेणी में आता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दोष सिद्ध होने पर संबंधित कॉलोनाइजरों को 3 से 7 वर्ष तक के कारावास और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह केवल प्रक्रियात्मक चूक नहीं, बल्कि एक गैर-जमानती आपराधिक कृत्य है।
*प्लॉट खरीदने से पहले जांचें दस्तावेज: एसडीएम-*
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि अपनी गाढ़ी कमाई फंसाने से पहले पूरी सतर्कता बरतें। एसडीएम सिद्धार्थ पटेल ने प्लाट धारकों से अपील की है केि नई कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पूर्व संबंधित भूमि का डायवर्शन, सक्षम अधिकारी से स्वीकृत ले-आउट, रेरा रजिस्ट्रेशन और कॉलोनाइजर लाइसेंस की पुष्टि अवश्य करें। अनधिकृत व अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध यह दंडात्मक अभियान आगे भी जारी रहेगा।
