जीवाजी विश्वविद्यालय में शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यशाला, इतिहास के पाठ्यक्रम में दिखेगी भारतीय ज्ञान परंपरा

ग्वालियर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जीवाजी विश्वविद्यालय में इतिहास विषय के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय की प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं अध्ययनशाला में बुधवार आज गुरुवार से शुरू हुई। कल 9 सितंबर को सुबह 10 बजे देशभर से आए इतिहास विषय के विशेषज्ञ पाठ्यक्रम में बदलाव और नए विषयों को शामिल करने को लेकर मंथन कर रहे हैं। कार्यशाला के मुख्य वक्ता गोरखपुर के डॉ. ईश्वर शरण विश्वकर्मा हैं। अध्यक्षता जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राजकुमार आचार्य कर रहे हैं। भोपाल से डॉ. मुकेश मिश्र, जबलपुर से डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, नई दिल्ली से डॉ. शिवकुमार मिश्र और उज्जैन से डॉ. प्रशांत पौराणिक विषय विशेषज्ञ के रूप में शामिल हैं।

*पहले दिन पीजी और यूजी पाठ्यक्रम पर मंथन*

उद्घाटन सत्र में स्नातकोत्तर प्रथम से चतुर्थ सेमेस्टर के पाठ्यक्रम निर्माण को लेकर बीज वक्तव्य दिया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर भी चर्चा हुई। पीजी प्रथम सेमेस्टर और यूजी द्वितीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम पर सुझाव दिए गए।

*कल तैयार पाठ्यक्रम होगा पेश*

कार्यशाला के दूसरे दिन कल सुबह 10 से 12 बजे तक पीजी तृतीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम पर चर्चा होगी। दोपहर 12:30 से 2 बजे तक पीजी चतुर्थ सेमेस्टर के पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए विशेषज्ञ सुझाव देंगे। इसके बाद दोपहर 3 से 4 बजे तक तैयार पीजी पाठ्यक्रम का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।

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