विंध्य की डायरी
डॉ रवि तिवारी
प्रशासनिक और राजनैतिक संरक्षण की चासनी में डूब कर विंध्य में पनपी व्यवस्था की मनमौजी धारा पर ब्यूरोक्रेसी की लगाम लगते ही जो मंजर देखने को मिला इसकी कल्पना शायद ही किसी ने कभी की हो. अपनी सहज कार्यशैली के साथ तल्ख रुख दिखाकर रातोरात नायक बनने की कहानी इस बार फिल्मी नही हकीकत से भरी हुई है. प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव ने विंध्य के नेताओ की शिकवा-शिकायतों की तासीर पर कुछ ऐसा पूर्ण विराम लगाया कि वर्षों से मनचाही जगहों में जमे अफसर,कर्मचारी सौपे गए दायित्व से मुक्त होने का ऐलान खुले आम करने लगे.
चर्चा तो यह है कि रीवा और सीधी के सत्तारुढ़ दल के नेताओ ने जिले के आला अधिकारियों के कार्यव्यवहार पर खुल कर अपनी राय सत्ता के शीर्ष तक पहुचाई. इसके बाद शुरू हुए मंथन से जो रत्न निकले उन्हें जनता का आभूषण बनाकर भेज दिया गया. जनता के गले मे पड़ते ही इन आभूषणों ने व्यवस्था की ऐसी चमक पैदा की दूसरे जौहरियों की आँखे चौधिया गई. हमेशा सिस्टम को जेब मे रखकर अपने अनुकूल व्यवस्था कायम करने के अनुभवी लोगो के पैरों तले जमीन खिसक गई.कभी किसी ने सोचा भी नही था कि स्कूल के हेडमास्टर की तरह हाथ मे रजिस्टर लेकर ठीक दस बजे कोई उनकी भी हाजरी लेने लगेगा.फिर तो वो सब होना ही था जो हुआ पर पहली बार जनता के बीच से समर्थन के जो स्वर उठे उसने सत्ता के बन्द गलियारे में बैठे चौकीदारों की न सिर्फ कुंडली खटखटा दी बल्कि इस ओर भी इशारा कर दिया है कि दिन में देखे सपने कभी भी टूट सकते हैं.
कार्यालय विहीन प्राधिकरण से विकास की उम्मीद
विकास की दृष्टि से पिछड़े विंध्य में विकास के नए आयाम तय करने के लिए एक बार फिर प्राधिकरण में राजनैतिक नियुक्ति का ऐलान कर दिया गया है. एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष के मार्गदर्शन में चलने वाले इस प्राधिकरण में पदस्थ बाबू भी शायद ही होगा.वर्षो तक गुमनामी में रहे इस प्राधिकरण में पहले जो पदस्थापना रही.बदली बयार में उन्होंने अपना ठिकाना ही बदल लिया.बगैर काम बिना अधिकारी कोई फिर होने वाली सुबह का इंतजार कब तक करता.अब देखना यह है कि विकास की उम्मीद की इस पोटली से कौन-कौन से नए खेल निकलते हैं.
न्यास बनाम प्राधिकरण
चित्रकूट में वनवासी भगवान राम के नाम पर वर्षो से जन भावनाओ को दिलासा देने के क्रम में इस बार एक साथ विकास के इतने मोर्चे खोल दिए गए हैं कि अब स्थानीय जनता भी भ्रमित होने लगी है कि कौन सा काम किस योजना के तहत हो रहा है. नगर पंचायत के बाद श्री राम वन गमन पथ न्यास साथ ही केंद्र की स्वदेश दर्शन बहुउद्देश्यीय विकास योजना और अब चित्रकूट विकास प्राधिकरण का गठन कर नगर पंचायत के 14 वार्ड में सिमटे चित्रकूट के धार्मिक महत्व के स्थलों का विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकास करने का प्रस्ताव है.इतना ही नही सौ करोड़ से ऊपर के काम चल भी रहे हैं. जिसकी एजेन्सियों पर आए दिन स्थानीय लोग प्रश्न खड़ा करते रहते हैं
