
विजय शर्मा। भोपाल। बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया की वास्तविक सीमा निर्धारित करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गठित दल का वैज्ञानिक सर्वे तीसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार को दोपहर करीब 1:30 बजे से शाम 6:15 बजे तक टीम ने चिरायु अस्पताल से लेकर कोलांस नदी तक अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर ड्रोन सर्वे और ग्राउंड ट्रुथिंग की। बड़े तालाब का जलस्तर फुल टैंक लेवल (एफटीएल) तक पहुंचने के बाद किए गए इस सर्वे में कैचमेंट और एफटीएल क्षेत्र से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आईं।
सर्वे के दौरान सबसे प्रमुख मामला बैरसिया विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस का सामने आया। टीम के अनुसार कोलूखेड़ी में विधायक के फार्म हाउस तक पहुंचने के लिए तालाब के कैचमेंट और वेटलैंड एरिया के अंदर सड़क बनाई गई है। यह सड़क नगर निगम की ओर से एफटीएल की सीमा तय करने के लिए लगाई गई दो मुनारों के बीच से होकर फार्म हाउस तक पहुंचती है। फार्म हाउस भी मुनारों से सटाकर बनाया गया बताया गया है।
मुनारों से बाहर तक पहुंचा पानी
ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान तालाब की एफटीएल सीमा तय करने के लिए पूर्व में लगाई गई कई मुनारें पानी में डूबी मिलीं। टीम के अनुसार भैंसाखेड़ा के बड़े अस्पताल के सामने से लेकर भैंसाखेड़ी, जमुनिया छीर, कोलूखेड़ी और खजूरी सड़क तक 12 से अधिक मुनारों के बाहर करीब 5 से 10 फीट तक पानी पहुंचा हुआ मिला।
कुछ स्थानों पर मुनारें पूरी तरह पानी में डूबी हुई थीं, जबकि कुछ मुनारें कपड़ों से ढकी हुई भी मिलीं। इससे एफटीएल की सीमा निर्धारित करने के लिए नगर निगम प्रशासन द्वारा पूर्व में लगाई गई मुनारों की सही लोकेशन और ऊंचाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सर्वे टीम का कहना है कि केवल मुनारों को आधार मानकर तालाब की सीमा तय करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रत्येक मुनारे की लोकेशन, ऊंचाई, एफटीएल स्तर और वर्तमान जलभराव की स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से सत्यापन जरूरी है।
विधायक के फार्म हाउस तक कैचमेंट में सड़क
कोलूखेड़ी में सामने आए विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस तक जाने वाली सड़क को लेकर भी सर्वे के दौरान सवाल उठे। टीम के अनुसार यह सड़क तालाब के वेटलैंड और कैचमेंट क्षेत्र से होकर बनाई गई है। सड़क दो मुनारों के बीच से होकर फार्म हाउस तक जाती है। मौके पर पानी का फैलाव भी मुनारों से आगे तक मिला।
वरिष्ठ पर्यावरणविद् और एनजीटी की ओर से नियुक्त विशेष सदस्य डॉ. सुभाष सी. पांडेय तथा याचिकाकर्ता राशिद नूर के अनुसार सर्वे का मुख्य उद्देश्य वर्तमान जलभराव और कैचमेंट क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को देखना है। बाउंड्रीवॉल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य निर्माण भी कई स्थानों पर दिखाई दिए हैं। इनकी वास्तविक स्थिति का मिलान राजस्व और तकनीकी रिकॉर्ड से किया जाना है।
एफटीएल में मलबा भराव का मामला भी सामने आया
सर्वे के दौरान ईशा अंबानी से जुड़े परिसर के संबंध में भी एफटीएल क्षेत्र में मलबा भराव किए जाने की बात सामने आई। टीम के अनुसार यहां तालाब के एफटीएल क्षेत्र के अंदर करीब छह फीट तक मलबा भराव किए जाने की जानकारी मिली है। इसके अलावा राकेश शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा तालाब क्षेत्र के अंदर मकान बनाए जाने की जानकारी भी सर्वे के दौरान सामने आई।
सीआई ऑटोमोबाइल का यार्ड भी एफटीएल क्षेत्र से लगा हुआ पाया गया। इन सभी स्थानों की वास्तविक स्थिति अब राजस्व रिकॉर्ड, मौके की स्थिति और एफटीएल सीमा के तकनीकी सत्यापन के बाद स्पष्ट होगी।
प्रदूषण विभाग के कर्मचारी का कैचमेंट में होटल
सर्वे के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े एक कर्मचारी द्वारा तालाब के नजदीक कब्जा कर रेस्टोरेंट निर्माण किए जाने की जानकारी भी सामने आई। टीम के अनुसार कैचमेंट क्षेत्र में होटल, रेस्टोरेंट और स्पोर्ट कोर्ट जैसी गतिविधियां भी दिखाई दीं। ऐसे में सवाल यह है कि जिन विभागों पर पर्यावरण और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेदारी है, उनसे जुड़े कर्मचारियों या अधिकारियों के स्तर पर कैचमेंट क्षेत्र में किए गए निर्माणों की निगरानी किस तरह की गई।
हालांकि इन निर्माणों की वैधानिक स्थिति और भूमि का वास्तविक रिकॉर्ड संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
इंदौर रोड से बैरागढ़ तक पक्के निर्माण
बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में सिर्फ कोलूखेड़ी ही नहीं, बल्कि भौंरी, खजूरी सड़क, मुगालिया छीर और बैरागढ़ सहित कई इलाकों में भी पक्के निर्माण सामने आए हैं। इंदौर रोड के मुख्य मार्ग से जुड़े क्षेत्रों में ढाबे, होटल, रेस्टोरेंट और ईंटों की फैक्ट्री तक निर्माण किए जाने की बात सामने आई है।
सर्वे टीम ने भौंरी सीपीए वृक्षारोपण क्षेत्र, कैंपियन स्कूल कार परिसर के सामने भौंरी, भौंरी जोड़, द आर्क के सामने, वायु होटल के सामने, यश ढाबा, कोलूखेड़ी, कोलूखेड़ी के घरों के अंदर, कर्व रेस्टोरेंट फिलिंग साइट, खजूरी सड़क स्थित ईंटों के कारखाने, बहता गांव बैरागढ़, आकाश गार्डन के पीछे ग्रीन क्लासिक रिजॉर्ट तथा नायरा पेट्रोल पंप के पीछे सेवन ओक्स क्षेत्र में भी ग्राउंड ट्रुथिंग की।
एनजीटी में पार्टी है ईंट फैक्ट्री, फिर भी नोटिस नहीं
खजूरी सड़क क्षेत्र में सामने आई ईंटों की फैक्ट्री को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया गया कि यह मामला एनजीटी की कार्यवाही से जुड़ा हुआ है और फैक्ट्री एनजीटी में पार्टी भी है। इसके बावजूद प्रशासन और नगर निगम की ओर से नोटिस नहीं दिए जाने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
अब सर्वे के बाद यह देखा जाना है कि संबंधित निर्माण एफटीएल, वेटलैंड या कैचमेंट की किस सीमा में आते हैं और इनके लिए किस विभाग से अनुमति ली गई है। यदि निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र में पाए जाते हैं तो संबंधित विभागों की ओर से कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट होगी।
पटवारियों और विभागीय अमले के सहयोग पर सवाल
ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान एनजीटी की टीम को अलग-अलग हल्कों के पटवारियों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की बात भी सामने आई। टीम के अनुसार केवल बहेटा गांव में पटवारी मौके पर पहुंचे, लेकिन उनसे भी अपेक्षित जानकारी नहीं मिल सकी।
वरिष्ठ पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडेय ने कहा कि सर्वे के दौरान राजस्व रिकॉर्ड की जानकारी के लिए पटवारियों का सहयोग जरूरी है। नगर निगम और वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी भी आवश्यक है, ताकि मौके पर मिली स्थिति का रिकॉर्ड से मिलान किया जा सके।
सर्वे के दौरान सीपीसीबी और एमपीपीसीबी के अधिकारी-कर्मचारी, पटवारी, याचिकाकर्ता राशिद नूर तथा एनजीटी द्वारा नियुक्त विशेष सदस्य डॉ. सुभाष सी. पांडेय मौजूद रहे। वहीं झील संरक्षण प्रकोष्ठ के प्रभारी संतोष गुप्ता करीब 10 मिनट के लिए मौके पर आए और इसके बाद वापस चले गए। सर्वे के दौरान नगर निगम और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी नजर नहीं आए।
भदभदा गेट खोलने पर रोक
बड़े तालाब का जलस्तर एफटीएल तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने एनजीटी के निर्देश पर भदभदा के गेट खोलने पर रोक लगा दी है। इसका उद्देश्य तालाब के मौजूदा जलस्तर और पानी के फैलाव की वास्तविक स्थिति को दर्ज करना है। इसी स्थिति में एनजीटी की टीम कैचमेंट एरिया की ग्राउंड ट्रुथिंग कर रही है।
तीन दिन के सर्वे में मुनारों के पानी में डूबने, मुनारों से आगे पानी पहुंचने, कैचमेंट में सड़क, पक्के निर्माण, मलबा भराव, होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य गतिविधियां सामने आई हैं। अब इन सभी स्थानों का वैज्ञानिक सर्वे, राजस्व रिकॉर्ड और पूर्व निर्धारित एफटीएल सीमा से मिलान किया जाएगा।
एनजीटी की टीम अपनी रिपोर्ट में मौके पर मिली वास्तविक स्थिति दर्ज करेगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन से निर्माण एफटीएल, वेटलैंड या कैचमेंट की निर्धारित सीमा में आते हैं और किन निर्माणों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की आवश्यकता है। बड़े तालाब की सुरक्षा और उसके कैचमेंट को अतिक्रमण तथा अनधिकृत निर्माण से बचाने के लिए यह सर्वे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
