24 साल पुराने आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्यपालन यंत्री को 5 साल की सजा

इंदौर. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री कैलाशचंद्र परवाल को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के 24 साल पुराने मामले में विशेष न्यायालय मंडलेश्वर ने पांच साल के सश्रम कारावास और 25 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है. फैसला विशेष एवं प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार चौहान की अदालत ने सुनाया. सजा के बाद परवाल को उपजेल मंडलेश्वर भेज दिया.

लोकायुक्त की अधिकृत जानकारी के अनुसार यह मामला 2002 में सामने आया था. धार निवासी शैलेन्द्र जोशी की 50 हजार रुपए रिश्वत मांगने की शिकायत पर लोकायुक्त ने तत्कालीन कार्यपालन यंत्री परवाल को रिश्वत लेते पकड़ा था. इसी मामले की विवेचना के दौरान उसकी संपत्ति की जांच हुई, जिसमें आय के अनुपात में अधिक संपत्ति मिलने पर 8 सितंबर 2002 को आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण दर्ज किया था. जांच में 1 अगस्त 1981 से 8 सितंबर 2002 तक की अवधि में परवाल की ज्ञात स्रोतों से आय 34 लाख 64 हजार 528 रुपए पाई गई. इसके मुकाबले संपत्ति और विभिन्न मदों में उसका खर्च 1 करोड़ 8 लाख 70 हजार 213 रुपए मिला. इस तरह 74 लाख 5 हजार 690 रुपए की अनुपातहीन संपत्ति सामने आई, जो ज्ञात आय से 213.75 प्रतिशत अधिक थी.

24 साल में हुई लंबी सुनवाई… 

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने करीब 131 साक्षियों के बयान कराए और 500 से अधिक दस्तावेज पेश किए. बचाव पक्ष की ओर से सात साक्षियों के बयान कराए गए और करीब 350 दस्तावेज प्रस्तुत किए. इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने परवाल को दोषी मानते हुए सजा सुनाई. खास बात यह है कि आय से अधिक संपत्ति का मामला 8 सितंबर 2002 को दर्ज हुआ था और ठीक 24 साल बाद 8 सितंबर 2026 को इसका फैसला आया.

25 लाख का अर्थदंड और सजा सुनाई 

मामले में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना है. उसे पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 25 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है.

विशेष लोक अभियोजक, प्रकाश सोलंकी

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