भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने अचानक करवट बदली है। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश के चलते सूखे की चिंता बढ़ी थी, लेकिन जुलाई-अगस्त के बाद सितंबर की शुरुआत में तेज बारिश ने हालात बदल दिए। प्रदेश में अब तक 30 इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है, जबकि सामान्य मानसूनी बारिश करीब 37.3 इंच है। कई जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
तेज बारिश का असर नदियों और निचले इलाकों में भी दिखाई दिया। चित्रकूट में मंदाकिनी उफान पर पहुंची, पन्ना और छतरपुर में नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव प्रभावित हुए। मैहर में नाले-पुलिया उफान पर रहे, सीधी में सड़क का हिस्सा बहा, श्योपुर में अमराल नदी का जलस्तर बढ़ा, जबकि ओरछा में करीब 7 इंच बारिश से कई इलाकों में जलभराव हुआ।
बारिश के चलते प्रदेश के कई बड़े डैम भी लबालब हो गए। बाणसागर डैम 100 प्रतिशत भरने के बाद 8 गेट खोले गए। बरगी डैम से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। भोपाल में बड़ा तालाब भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खोले गए, जबकि कलियासोत डैम के भी गेट खोले गए। गुना के गोपीकृष्ण सागर डैम के 2 गेट खोलकर आसपास के 7 गांवों को हाई अलर्ट पर रखा गया। मंदसौर के अटल सागर डैम के भी 2 गेट खोले गए।
यानी कुछ ही समय में मध्य प्रदेश में तस्वीर बदल गई—पहले सूखे की चिंता, अब तेज बारिश, उफनती नदियां, लबालब डैम और बाढ़ का खतरा।
