विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर राज्य, गांव और नागरिक का विकसित होना जरूरी – राधाकृष्णन

नयी दिल्ली, 07 सितंबर (वार्ता) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के हर राज्य, गांव और नागरिक का विकसित होना जरूरी है।

श्री राधाकृष्णन ने सोमवार को शिलांग में मेघालय सरकार और जनता की ओर से आयोजित सार्वजनिक स्वागत समारोह में कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के हर राज्य, गांव और नागरिक का विकसित होना जरूरी है।

उप राष्ट्रपति ने मेघालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और मातृसत्तात्मक परंपरा जैसी विशिष्ट सामाजिक व्यवस्थाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य की मजबूत जमीनी संस्थाएं भारत की विविधता और लोकतांत्रिक परंपराओं को दर्शाती हैं। अपने पूर्व लोकसभा सहयोगी और दिवंगत पी.ए. संगमा को याद करते हुए राधाकृष्णन ने उन्हें महान नेता और उत्कृष्ट सांसद बताया।

उन्होंने कहा कि संगमा ने संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उन्होंने सच्ची धर्मनिरपेक्षता को एक-दूसरे के विचारों और मान्यताओं के सम्मान से जोड़ते हुए समाज में आपसी सम्मान और सद्भाव बनाए रखने की अपील की।

कनेक्टिविटी को विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दूरदराज के गांवों को कस्बों और शहरों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में 47,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर 46,000 किलोमीटर से ज्यादा ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है।

उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर 1,010.95 करोड़ रुपये की पांच परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें शहरी चुनौती कोष के तहत नई शिलांग जल आपूर्ति योजना चरण- द्वितीय, दो सड़क संपर्क परियोजनाएं, शिलांग सिविल अस्पताल में 30 बिस्तरों वाला आयुष केंद्र और मावखानू में 132/33 केवी सबस्टेशन शामिल हैं।

श्री राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 31.05 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नोंगस्टोइन स्थित प्रसूति एवं बाल अस्पताल का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि लगभग 1,042 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से मेघालय में जल आपूर्ति, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं और बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। उन्होंने राज्य सरकार की होमस्टे कार्यक्रम, सीएम-एलिवेट और ग्रीन मेघालय जैसी पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विकास के साथ मेघालय के पर्यावरण, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण भी जरूरी है।

 

 

 

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