नगर परिषदों के कर्मचारियों का संविलियन निरस्त, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई सही ठहराई

अनूपपुर, जिले की बनगवां, डोला और डुमरकछार ग्राम पंचायतों के नगर परिषद में परिवर्तन के बाद कर्मचारियों के संविलियन को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर सभी 14 रिट अपीलें स्वीकार करते हुए 23 जनवरी 2024 को एकल पीठ द्वारा पारित संयुक्त आदेश को निरस्त कर दिया। खंडपीठ ने माना कि राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 331(2) के तहत प्राप्त पुनरीक्षण अधिकार का विधिसम्मत प्रयोग करते हुए कर्मचारियों के संविलियन की वैधता और औचित्य की जांच की थी। कोर्ट ने यह भी माना कि संबंधित कर्मचारियों को आदेश पारित करने से पहले अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था।

2016 में हुआ था नगर परिषदों का गठन

मामले की शुरुआत 26 सितंबर 2016 को हुई, जब बनगवां, डोला और डुमरकछार ग्राम पंचायतों को नगर परिषद में परिवर्तित किया गया। कर्मचारियों के संविलियन के लिए समितियां गठित की गईं। बाद में संविलियन में अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं, जिनमें गैर-कर्मचारियों को भी संविलियन का आरोप था। जांच में अनियमितताएं सामने आने पर राज्य सरकार ने संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया।

15 जुलाई 2022 को संविलियन निरस्त, 22 जुलाई को सेवाएं समाप्त

सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य सरकार ने 15 जुलाई 2022 को संविलियन की कार्रवाई निरस्त करने का आदेश जारी किया। इसके बाद 22 जुलाई 2022 को संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए गए।प्रभावित कर्मचारियों ने राज्य सरकार के 15 और 22 जुलाई 2022 के आदेशों को हाईकोर्ट की एकल पीठ में चुनौती दी थी। एकल पीठ ने 23 जनवरी 2024 को दोनों आदेशों को निरस्त करते हुए अधिकारियों को कानून के अनुसार नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर नए सिरे से कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी थी। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में रिट अपीलें दायर की थीं।

नोटिस और सुनवाई का रिकॉर्ड मौजूद

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने कहा कि 15 जुलाई 2022 के आदेश से पहले सभी संबंधित कर्मचारियों को पर्याप्त अवसर दिया गया था। रिकॉर्ड में नोटिस, सुनवाई कार्यक्रम और कर्मचारियों के जवाब मौजूद पाए गए। खंडपीठ ने माना कि सरकार ने नगरपालिका अधिनियम की धारा 331(2) के तहत संविलियन की वैधता और औचित्य की जांच की थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार की सभी 14 रिट अपीलें स्वीकार करते हुए एकल पीठ का 23 जनवरी 2024 का आदेश निरस्त कर दिया। इसके साथ ही बनगवां, डोला और डुमरकछार नगर परिषदों के कर्मचारियों के संविलियन से जुड़े विवाद में राज्य सरकार को राहत मिली।

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