
नयी दिल्ली, 07 सितंबर (वार्ता) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्या निकेतन हादसे के बाद सोमवार को कहा कि दिल्ली सरकार नगर निगम के साथ मिलकर ऐसी नीति लाने की दिशा में काम कर रही है, जिसके तहत सार्वजनिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक भवन चाहे वह पीजी, नर्सिंग होम, स्कूल या कोई अन्य संस्थान हो का समय-समय पर संरचनात्मक ऑडिट और भवन सुरक्षा प्रमाणन अनिवार्य किया जायेगा। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर सोमवार को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया। इसके साथ ही घटना के दूसरे दिन आज सुबह भी मुख्यमंत्री स्वयं एक बार फिर घटनास्थल का दौरा करने पहुंचीं।
इस दौरान उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से बचाव, राहत तथा सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने घटनास्थल के निरीक्षण और प्रारंभिक आकलन के आधार पर घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिये हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से यह भी आग्रह किया है कि वे निर्माणाधीन अवैध निर्माणों पर निगाह रखें और उसकी शिकायत संबंधित विभाग को दें, ताकि उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भवनों और निर्माण कार्यों से जुड़ी किसी भी ऐसी स्थिति को दरकिनार नहीं किया जायेगा, जिससे लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जांच चल रही है। इस हादसे में और भी अधिकारियों की लापरवाही सामने आयी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार नगर निगम के साथ मिलकर ऐसी नीति लाने की दिशा में काम कर रही है, जिसके तहत सार्वजनिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक भवन चाहे वह पीजी, नर्सिंग होम, स्कूल या कोई अन्य संस्थान हो का समय-समय पर संरचनात्मक ऑडिट और भवन सुरक्षा प्रमाणन अनिवार्य किया जायेगा। बिना भवन की सुरक्षा सुनिश्चित किए किसी भी इमारत में सार्वजनिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जायेगी।
मुख्यमंत्री ने राजधानी के सांसदों, विधायकों, पार्षदों से आग्रह किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में बनाये जा रहे अवैध निर्माणों की जानकारी प्राप्त करें और इसकी शिकायत संबंधी विभाग को भेजें। उन्होंने कहा कि ऐसे अवैध निर्माणों को तोड़ा जायेगा। निर्माणाधीन अवैध निर्माणों को लेकर सिस्टम बनाया जायेगा ताकि उन पर निगरानी भी रखी जा सके। इस प्रकार की शिकायतों की निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिये हैं कि केवल घटनास्थल तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि आसपास के सभी संवेदनशील भवनों और पीजी की भी गहन जांच की जाये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुरानी इमारत के बेसमेंट में पानी भरने के कारण उसके पिलर कमजोर होकर गिर गये, जिससे पूरी इमारत ढह गयी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस गंभीर घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जायेगा, उसकी जवाबदेही तय की जायेगी और उसके खिलाफ कानून के कठोरतम प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल और व्यापक कार्रवाई के निर्देश भी दिये हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित छात्रों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर अन्य कॉलेजों के छात्रावास में ठहराया गया है और सरकार उनकी सभी आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रख रही है। हादसे में घायल छात्रों के परिजनों के साथ भी सरकार लगातार संपर्क में है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता दिल्लीवासियों की जान-माल की सुरक्षा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या सुरक्षा मानकों से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा और दोषी पाये जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।
