चेन्नई, 01 फरवरी (वार्ता) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश केंद्रीय बजट को निराशाजनक बताया और कहा कि यह राज्य के साथ केंद्र के लगातार सौतेले व्यवहार को दिखाता है।
दो महीने में विधानसभा चुनाव हैं। उन्हें इसलिए बजट में कुछ अहम घोषणाओं की उम्मीद थी, लेकिन ऐसी कोई पहल नजर नहीं आती है।
श्री स्टालिन ने कहा, “आने वाले चुनावों के मद्देनजर कम से कम इस वर्ष हमने सोचा था कि हमारे अधिकारों की आवाज केंद्र सरकार सुनेगी, लेकिन वह उम्मीद भी झूठी निकली… भाजपा सरकार ने हमें निराश किया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026-27 के बजट में तमिलनाडु के कल्याण का पूरी तरह से बॉयकॉट किया गया है। इसमें ऐसी कोई भी काम की योजना नहीं है, जिससे गरीबों, महिलाओं, किसानों, हाशिये पर पड़े लोगों या समाज के किसी अन्य वर्ग का फायदा हो।
उन्होंने कहा कि बार-बार और असरदार तरीके से यह बताने के बावजूद कि केंद्र कर से राजस्व बंटवारे में तमिलनाडु जैसे विकसित राज्यों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है, बजट में राज्य की कुल कर राजस्व हिस्सेदारी 41 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की मांग का कोई जिक्र नहीं है। यह निराशाजनक है।
इतना ही नहीं, तमिलनाडु दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा है। वह देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान देता है। यह दुख की बात है कि इसके बावजूद दूसरे विकसित राज्यों की तुलना में इस राज्य की राजस्व में हिस्सेदारी कम है, जबकि 16वें वित्तीय आयोग ने इसे मान्यता दी थी।
श्री स्टालिन ने कहा कि इसका मतलब है कि अगले पांच सालों तक तमिलनाडु का कर राजस्व में हिस्सा सिर्फ 4.097 फीसदी ही रहेगा और शुरुआती अनुमानों के मुताबिक राज्य को इससे 5,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु को वित्तीय आवंटन में लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इसे 16वें वित्त आयोग में भी ठीक नहीं किया गया। यह एक चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों में राज्य के साथ सौतेले व्यवहार की बात कहने के बावजूद केंद्रीय कर में तमिलनाडु का हिस्सा 1200 करोड़ रुपये तक कम कर दिया गया है। यह निंदनीय है। उन्होंने जल जीवन अभियान योजना के तहत राज्य के लिए 3,112 करोड़ रुपये का फंड जारी न करने की ओर भी इशारा किया।
श्री स्टालिन ने कहा कि इस साल के बजट में सिर्फ 17,000 करोड़ रुपये दिये गये, जबकि 2025-26 के बजट में 67,000 करोड़ रुपये दिये गये थे। इससे पता चलता है कि यह योजना खत्म करने की कोशिश है। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क विकास योजना और प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लिए आवंटन में कमी की ओर भी इशारा किया।
लेकिन सबसे बड़ी निराशा प्रधानमंत्री प्रशिक्षण योजना के लिए फंड में कमी है। इस वित्तीय वर्ष के लिए सिर्फ 526 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं, जबकि पिछले बजट में 10,831 करोड़ रुपये आवंटित कर इसे बड़े जोर-शोर से लॉन्च किया गया था। इस वजह से लोगों को लग रहा है कि यह योजना पूरी तरह से फ्लॉप है। श्री स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के साथ सौतेला रवैया अपना रही है। उन्होंने एनईपी-2020 के तहत सोचे गये त्रिभाषा फॉर्मूले को स्वीकार नहीं करने के लिए विद्यालय शिक्षा विभाग के लिए 3,548 करोड़ रुपये का समग्र शिक्षा अभियान फंड और जल जीवन अभियान के तहत 3,112 करोड़ रुपये का फंड जारी नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “इससे साफ पता चलता है कि केंद्र तमिलनाडु के साथ लगातार सौतेला व्यवहार कर रहा है।”
श्री स्टालिन ने कहा कि बजट में तमिलनाडु के लिए कोई खास योजना/परियोजना नहीं है। उन्होंने आगे कहा, “कुल मिलाकर यह निराशाजनक… निराशाजनक… निराशाजनक है।”
