झारखंड के कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार का 56 साल की उम्र में निधन, हेमंत सरकार में पद पर रहते चौथे मंत्री की मौत

रांची, 06 सितंबर (वार्ता) झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में दूसरी बार दिसंबर 2019 में सरकार बनने के बाद से अब तक उनके मंत्रिमंडल के चार मंत्रियों का पद पर रहते निधन हो चुका है।

मंत्री रहते हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार का असामयिक निधन राज्य की राजनीति के लिए एक गहरा आघात है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के 2019 में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद चौथे मंत्री ने पद पर रहते हुए दुनिया को अलविदा कह दिया।

हेमंत सोरेन के पहले कार्यकाल (2019-24) में दो मंत्रियों का निधन हुआ, जबकि मौजूदा कार्यकाल के दूसरे वर्ष के पूरा होने से पहले ही दो मंत्रियों की मौत हो चुकी है।

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहे हाजी हुसैन अंसारी 73 वर्ष के थे। कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद उन्होंने संक्रमण को मात दी, लेकिन बाद में हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद उनके बेटे हफीजुल हसन को मंत्री बनाया गया। बाद में उन्होंने मधुपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज की। 2024 के विधानसभा चुनाव में भी हफीजुल हसन निर्वाचित हुए और वर्तमान सरकार में मंत्री हैं।

स्कूली शिक्षा एवं उत्पाद विभाग के मंत्री जगरनाथ महतो का 56 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। कोरोना संक्रमण के कारण उनके फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हुए थे। लंबे समय तक इलाज चलने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को मंत्री बनाया गया और डुमरी विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ाया गया। बेबी देवी ने उपचुनाव में जीत दर्ज की, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्हें जयराम महतो के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

उसके बाद स्कूली शिक्षा, साक्षरता एवं निबंधन मंत्री रहे रामदास सोरेन का 62 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। किडनी प्रत्यारोपण के बाद उनकी तबीयत पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी। 2 अगस्त 2025 को घर के बाथरूम में गिरने के बाद उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के अपोलो अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 15 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया।

उनके निधन के बाद झामुमो ने उनके बेटे सोमेश सोरेन को घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया। सोमेश सोरेन ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया।

गिरिडीह से 56 वर्षीय विधायक सुदिव्य कुमार इन चारों मंत्रियों में सबसे युवा और सक्रिय नेताओं में शामिल थे। उन्होंने 2019 और 2024 के विधानसभा चुनाव में गिरिडीह सीट से जीत दर्ज की थी। हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें सबसे सक्रिय और प्रभावशाली मंत्रियों में गिना जाता था।

बेबाक और मुखर कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले सुदिव्य कुमार विधानसभा के भीतर और बाहर विपक्षी दलों के सवालों का तार्किक जवाब देने के लिए जाने जाते थे। गिरिडीह के स्थानीय विकास कार्यों में भी उनकी व्यक्तिगत रुचि रहती थी। यही वजह थी कि क्षेत्र की जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ और लोकप्रियता थी।

हाल के दिनों में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलनों के दौरान सरकार की ओर से मध्यस्थता करने तथा छात्रों से बातचीत का मोर्चा संभालने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। वह लगातार छात्रों और सरकार के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिशों में सक्रिय रहे।

शनिवार को भी सुदिव्य कुमार शिक्षक दिवस से जुड़े कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय थे। देर रात गिरिडीह स्थित अपने आवास पर अचानक उनके सीने में दर्द हुआ और तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल गिरिडीह के स्थानीय मर्सी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद आज तड़के उन्हें बचाया नहीं जा सका।

सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू का अचानक निधन झारखंड की राजनीति के लिए बड़ा झटका है।

 

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