
श्री खरगे ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में श्री मोदी के कल के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि एसआरसीसी जाना देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद का एक अवसर था, लेकिन युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय प्रधानमंत्री का भाषण फिर राजनीतिक प्रचार में बदल गया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवालों को दबाने के लिए विपक्ष को नए-नए विशेषण दिए जाते हैं, ताकि सरकार की अपनी नाकामियां छिपी रहें। उन्होंने ‘नाराज़ फूफा’, ‘दिमागी नक्सल’, ‘अर्बन नक्सल’, ‘खान मार्केट गैंग’, ‘आंदोलनजीवी’ और ‘परजीवी’ जैसे विशेषणों का उल्लेख किया और कहा कि इस तरह की विशेषण विपक्ष के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं।
श्री खरगे ने कहा कि विशेषण बदलते रहते हैं, लेकिन मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियां नहीं बदलतीं। उन्होंने कहा, “मोदी जी, आउटरीच तभी करनी पड़ती है, जब आप आउट ऑफ रीच हो जाते हैं।”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना ‘रिपोर्ट कार्ड’ दिखाया, लेकिन देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है। इसमें बेरोजगारी, वर्षों से अटकी सरकारी भर्तियां, पेपर लीक से परेशान विद्यार्थी, महंगी होती शिक्षा, घटते छात्रवृत्ति अवसर और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर बढ़ता दबाव शामिल है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को ‘छात्रों की गूंज’ सुननी चाहिए, क्योंकि इधर-उधर की बातों से समाधान नहीं निकलेगा।
