प्लेटफॉर्म के बाहर अतिक्रमण का राज, ठेले, टपरे वहीं सजे जहां रास्ता चाहिए

जबलपुर: मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक छह के बाहर अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। यात्रियों के आने-जाने के लिए छोड़ा गया स्थान धीरे-धीरे वाहनों की पार्किंग, अस्थायी कब्जों और अव्यवस्थित गतिविधियों की चपेट में आता जा रहा है। स्थिति यह है कि स्टेशन से बाहर निकलने वाले यात्रियों को कई जगह रास्ता बचाकर निकलना पड़ता है। सामान लेकर चल रहे यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है। जिस जगह यात्रियों की सुविधा के लिए खुला और व्यवस्थित रास्ता होना चाहिए, वहां बढ़ती अव्यवस्था देखकर ऐसा लगता है जैसे व्यवस्था ने अतिक्रमण के आगे घुटने टेक दिए हों।
संयुक्त कार्रवाई भी साबित हो रही बेअसर
अतिक्रमण हटाने के लिए रेलवे और नगर निगम की ओर से समय-समय पर संयुक्त कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसका स्थायी असर दिखाई नहीं देता। कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए रास्ता साफ नजर आता है और ऐसा लगता है कि अब व्यवस्था सुधर जाएगी, लेकिन कुछ ही समय बाद स्थिति फिर पुराने ढर्रे पर लौट आती है। सवाल यह है कि यदि कार्रवाई के बाद भी अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है तो आखिर निगरानी कौन कर रहा है? अभियान चलाने के बाद दोबारा कब्जा रोकने की जिम्मेदारी तय नहीं होने से कार्रवाई महज औपचारिकता बनती जा रही है। यात्रियों का कहना है कि केवल अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं, बल्कि नियमित गश्त और निगरानी के जरिए यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि हटाए गए कब्जे दोबारा उसी स्थान पर न जम जाएं।
आरपीएफ कार्रवाई से क्यों बच रही?
प्लेटफॉर्म छह के बाहर अव्यवस्था के बीच पुलिस और आरपीएफ के वाहन भी खड़े दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब जिम्मेदार सुरक्षा एजेंसियों के वाहन मौके पर मौजूद रहते हैं तो यात्रियों के रास्ते में बाधा बन रही गतिविधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? यात्रियों की सुरक्षा और स्टेशन परिसर की व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी आरपीएफ की भी है, लेकिन मौके की स्थिति देखकर लगता है कि कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदार अमला हालात को नजरअंदाज करने में ज्यादा सहज है। अतिक्रमण के कारण रास्ता संकरा होने से कभी भी भीड़ के समय परेशानी गंभीर रूप ले सकती है। रेलवे और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसके बाद भी मैदान में निगरानी नजर आए और यात्रियों के रास्ते पर दोबारा कब्जा करने वालों पर सख्ती हो। फिलहाल हालात यही संदेश दे रहे हैं कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कागजों पर तेज है, लेकिन जमीन पर कब्जे उससे भी ज्यादा तेज रफ्तार से लौट रहे हैं।

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