फॉकलैंड विवाद : अर्जेंटीना ने तेल कंपनियों पर प्रतिबंधों का किया एलान, ब्रिटेन बोला- संप्रभुता सबसे ऊपर

लंदन/ब्यूनस आयर्स, 04 सितंबर (वार्ता) अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने ब्रिटिश नियंत्रण वाले फॉकलैंड (मालविनास) द्वीप समूह के पास काम कर रही तेल कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने और क्षेत्र में नये नौसैनिक अड्डे के विस्तार की घोषणा की है। श्री माइली के इस राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड और रक्षा सचिव वेस स्ट्रीटिंग ने कड़ा पलटवार करते हुए स्पष्ट किया है कि फॉकलैंड द्वीप पर ब्रिटेन की संप्रभुता ‘अटल और सर्वोपरि’ है।

राष्ट्रपति माइली ने गुरुवार तीन सितंबर की रात राष्ट्र के नाम विशेष संबोधन में फॉकलैंड में जारी 2028 की ‘सी लायन’ तेल परियोजना को अर्जेंटीना के संसाधनों के लिए ‘गंभीर और सीधा खतरा’ बताया। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति तेल निष्कर्षण में लगी कंपनियों और उनकी सहयोगी फर्मों पर शिकंजा कसने के लिए कानून में संशोधन किया जायेगा। इसके साथ ही उन्होंने सबसे दक्षिणी प्रांत ‘टिएरा डेल फुएगो’ में नौसैनिक अड्डे का विस्तार करने का भी एलान किया।

यह विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस साक्षात्कार के बाद गरमाया, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि अर्जेंटीना से किसी संभावित युद्ध की स्थिति में अमेरिका ब्रिटेन का साथ नहीं देगा। श्री ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान के दौरान ब्रिटेन से मदद न मिलने पर नाराजगी जतायी। इसके अलावा, पेंटागन नाटो सहयोगियों पर रक्षा बजट बढ़ाने का दबाव बनाने के उद्देश्य से फॉकलैंड पर ब्रिटेन के दावे की समीक्षा भी कर रहा है। श्री माइली ने श्री ट्रंप के इस रणनीतिक रुख को अपने पक्ष में बताया।
ब्रिटिश रक्षा सचिव वेस स्ट्रीटिंग ने श्री माइली के इस कदम को अर्जेंटीना की गिरती लोकप्रियता से जुड़ा घरेलू राजनीतिक हथकंडा करार दिया।

2013 के जनमत संग्रह में 99.8 फीसदी फॉकलैंड निवासियों ने ब्रिटेन के साथ रहने के पक्ष में वोट दिया था। वर्ष 1982 के 74-दिवसीय फॉकलैंड युद्ध में 645 अर्जेंटीनी और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गये थे।
हाल ही में हुए फीफा विश्व कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने “फॉकलैंड्स अर्जेंटीना का है” लिखा बैनर फहराया था। इस पर फीफा ने अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन पर 3.21 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया था।

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