
जबलपुर। मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में कम समय में पैसा दोगुना करने या एफडी पर अधिक ब्याज देने का झांसा देकर अरबों का चिटफंड घोटाला करने वाली सोसायटियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय के बाद अब जबलपुर सीआईडी ने खोजबीन तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक जबलपुर सीआईडी की एक टीम मंगलवार को उत्तर प्रदेश पहुंची जहां मामले की तफ्तीश की जा रही हैं। सीआईडी की एक टीम ललितपुर थाने भी पहुंची जहां फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला। कुछ अहम दस्तावेज भी हाथ लगे है। जिन पर छानबीन चल रही है। इसके अलावा ललितपुर थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपी जेल में बंद है जिनसे भी सीआईडी पूछताछ की तैयारी में है जिसमें नए खुलासे होने की उम्मीद है।
विदित हो कि चिटलर गैंग ने विभिन्न कंपनियाँ सोसायटी अलग-अलग नामों से पंजीयन करवाकर अलग-अलग समय पर पैसा दोगुना करने या अधिक ब्याज एफडी देने का झांसा देकर देश के करीब 3 करोड़ 51 लाख निवेशकों से धोखाधड़ी करके 1 खरब 5 अरब 12 करोड़ 62 लाख की राशि निवेश कराये थे । केवल मध्य प्रदेश में 2 लाख 10 हजार से अधिक निवेशकों की लगभग 4 अरब 92 करोड़ 20 लाख रुपये निवेश किए है। मामले में पहले से सीबीआई, ईडी जांच कर रही है। अब इन केस से जुड़ी 11 केस डायरियां जबलपुर सीआईडी को मिली है।
मुरैना का सरगना, ललितपुर में फैला था बड़ा नेटवर्क, काला चिट्ठा जुटा रही टीम-
सूत्रों के मुताबिक जालसाजी का बड़ा नेटवर्क ललितपुर से जुड़ा हुआ है। उप्र के ललितपुर में ही इन जालसाजों पर कई अपराध दर्ज हैं। इन चिटफंड कंपनियों का सरगना मूलत: मुरैना निवासी समीर अग्रवाल है, जिसने इस ठगी की गैंग के लिए छोटे जिलों और कस्बों में सोसायटियां खोलकर वहां के लोगों के साथ मिलकर घोटाला किया है। ललितपुर में रवि तिवारी, आलोक कुमार जैन, सुरेन्द्र पाल उर्फ सुरेन्द्र पाल सिंह के इशारे पर चिटफंड कंपनियां खोली गई थीं बल्कि करोड़ों का घोटाला हुआ। केस डायरियां मिलने के बाद इसी मामले की तफ्तीश के लिए सीआईडी सबसे पहले ललितपुर ही रवाना हुई और वहां से काला चिट्ठा जुटाया जा रहा है ।
