जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने गलत वेतन निर्धारण के आधार पर निकाली गई रिकवरी को अनुचित पाते हुए निरस्त करने का आदेश सुना दिया। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कहा कि रिकवरी राशि छह प्रतिशत ब्याज के साथ दो माह में लौटाएं। ऐसा न करने पर 10 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
याचिकाकर्ता नरसिंहपुर निवासी हरीश तिवारी की ओर से दलील दी गई कि गलत वेतन निर्धारण का हवाला देकर याचिकाकर्ता के विरुद्ध 92 हजार रुपये की रिकवरी निकाली गई। रिकवरी की राशि वेतन से काट ली गई। हाईकोर्ट ने महेन्द्र अहिरवार के प्रकरण में इस तरह के मामले में विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। यह मामला भी समान प्रकृति का है। हाईकोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद याचिकाकर्ता के हक में राहतकारी आदेश पारित कर दिया।
