हैंडओवर से पहले करोड़ों के स्कूल भवन में दरारें

सिंगरौली। सरकारी निर्माण की चमकदार तस्वीर के पीछे अगर दरारें छिपी हों तो सवाल केवल गुणवत्ता का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और निगरानी की पूरी व्यवस्था का खड़ा होता है। मोरवा वार्ड क्रमांक-1 के पेड़ताली क्षेत्र में कन्या महाविद्यालय के आगे स्थित शासकीय हाईस्कूल देवरीडांड़ के लिए तैयार हो रहा नया भवन हैंडओवर से पहले ही सवालों के घेरे में आ गया है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे भवन की दीवालों में कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कुछ हिस्सों में प्लास्टर टूटकर गिरने की स्थिति में है। बताया जा रहा है कि भवन का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। दीवालों पर प्लास्टर-पेंट और फर्श पर टाइल्स तक लग चुकी हैं। ऐसे में उपयोग शुरू होने से पहले ही भवन में क्रैक सामने आना निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इधर लाखों-करोड़ों रूपये की लागत से बनाए जा रहे उक्त स्कूल भवन शैसवकाल के दौरान जगह-जगह दरार आने पर क्रियान्वयन एजेंसी एनसीएल एवं ठेकेदार सवालों के कटघर्रे में घिर रहा है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

क्षेत्र में होने वाली ब्लास्टिंग को दरारों का संभावित कारण बताया जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह तर्क भी सवालों के घेरे में है। यदि निर्माण स्थल ब्लास्टिंग क्षेत्र से करीब 3 से 4 किलोमीटर दूर है, तो नए भवन में इतनी गंभीर दरारें क्यों उभर आई? क्या निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का सही तरीके से पालन हुआ? क्या निर्माण के प्रत्येक चरण में सक्षम अधिकारियों ने गुणवत्ता परीक्षण किया? सबसे गंभीर सवाल यह है कि हैंडओवर से पहले ही यदि भवन की दीवाल जवाब देने लगी हैं तो सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? निर्माण में कथित गुणवत्ता की कमी को लेकर अब कमीशनखोरी की बू आने जैसी चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं, हालांकि इसकी वास्तविकता निष्पक्ष तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगी।

एनसीएल के सीएसआर मद से बन रहा भवन

पिछले वर्ष तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर एनसीएल के द्वारा जिले में 10 स्कूल भवन बनाने के लिए सीएसआर मद से राशि मंजूर हुई थी। देवरीडांड़ में एनसीएल के सीएसआर मद से स्कूल भवन निर्माण के लिए लाखों रूपये की मंजूरी मिली हुई थी, किंतु अभी भवन हैंडओवर किया नही, उसके पहले ही एक नही कई जगह दिवाल क्रैक हो गई और दिवाल के प्लास्टर गिरने लगे। स्थानीय नागरिको का कहना है कि जब भवन की अभी से यह स्थिति है तो आने वाले दिनों में भवन कितने दिन टीक पाएगा, इस पर अभी कुछ भी कह पाना जल्दबाजी होगी। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उक्त स्कूल भवन गुणवत्ता विहीन होने के कारण कमीशनखोरी है।

इनका कहना:-

भवन के हैंडओवर की प्रक्रिया अभी आरंभ नही है। एनसीएल के द्वारा कार्य कराया जा रहा है। भौतिक सत्यापन के बाद ही भवन को लिया जाएगा और भवन में जो भी कमियां होंगी, उन कमियों एवं जरूरतो को एनसीएल पूर्ण कराएगा।

कविता त्रिपाठी

डीईओ, सिंगरौली

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