बंगाल एसआईआर : उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग से मांगे लंबित अपीलों के आंकड़े, 2029 चुनावों से पहले प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम हटाये जाने और शामिल किये जाने के खिलाफ दायर अपीलों की लंबित स्थिति, उनके निपटारे और इसके परिणामस्वरूप मतदाता सूची को अद्यतन करने के संबंध में चुनाव आयोग (ईसीआई) से विस्तृत आंकड़े मांगे।

इसके साथ ही न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि संपूर्ण अपीलीय प्रक्रिया 2029 के लोकसभा चुनावों से काफी पहले पूरी की जानी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित और पहले ही निपटाये जा चुके मामलों का ब्योरा तथा उनमें मांगी गयी राहत की प्रकृति के बारे में विवरण मांगा।आयोग से उन अपीलों की भी अलग से पहचान करने को कहा गया है, जिनमें मतदाताओं ने अपने नाम हटाये जाने को चुनौती दी है और जिनमें शामिल नामों को हटाने की मांग की गयी है। न्यायालय ने न्यायाधिकरणों की स्वीकार की गयी अपीलों, मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए उठाये गये निर्णायक कदमों और लंबित मामलों के निपटारे को सुव्यवस्थित तथा तेज करने के लिए किये जा रहे उपायों का ब्योरा भी मांगा है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आयोग के अधिवक्ता से कहा, “कृपया अपीलीय न्यायाधिकरणों के निपटारे के तरीके को सुव्यवस्थित करने के लिए आपके दिये गये सुझावों और किये गये बदलावों का भी प्रस्ताव रखें।”

ये निर्देश उन याचिकाओं के बाद आये हैं, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने उन मतदाताओं की अपीलों को प्राथमिकता देने की मांग की थी, जिनके नाम हटा दिये गये थे तथा अपनी बेदखली को सफलतापूर्वक चुनौती देने वालों के नामों को शामिल करते हुए पूरक मतदाता सूची के त्वरित प्रकाशन की मांग की थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि लगभग 38 लाख अपीलों में से केवल सात लाख अपीलें उन व्यक्तियों ने दायर की थीं, जिनके नाम हटाये गये थे, जबकि शेष 31 लाख अपीलें आयोग के या मतदाताओं के नाम शामिल किये जाने पर आपत्ति जताने वाले व्यक्तियों ने दायर की थीं। उन्होंने तर्क दिया कि हटाये गये मतदाताओं की अपीलों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, विशेष रूप से नगर पालिका और पंचायत चुनाव नजदीक आने के कारण, ताकि अंततः शामिल किये जाने के पात्र पाये गये व्यक्तियों को उनके वोट के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने भी कहा कि जिन लोगों के नाम हटा दिये गये हैं, यदि उनकी अपीलों पर निर्णय नहीं लिया गया और समय पर मतदाता सूची अद्यतन नहीं की गयी तो वे वोट देने का अपना अवसर खो सकते हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ” इस मुद्दे पर हम आपके साथ हैं। संसदीय चुनावों से काफी पहले सब कुछ तय हो जाना चाहिए।”

श्री बनर्जी ने उन चुनाव क्षेत्रों का भी उल्लेख किया, जहां हालिया विधानसभा चुनावों में जीत का अंतर हटाये गये मतदाताओं की संख्या से कम था, वहीं मुर्शिदाबाद में बड़े पैमाने पर नाम हटाने का आरोप लगाया।

आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस नायडू ने कहा कि आयोग निपटारे में तेजी लाने के लिए आवश्यक बदलावों पर अपीलीय न्यायाधिकरणों के साथ समन्वय कर रहा है, जिसमें पोर्टल के आर्किटेक्चर से संबंधित मुद्दे भी शामिल हैं और वह प्रस्तावित उपायों को न्यायालय के समक्ष रखेगा।

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