जबलपुर:आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति प्राप्त कर लेने के कारण स्कूल शिक्षा विभाग की काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रशासनिक कारणों से मेरिट में आने वाले उम्मीदवार को अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार की तुलना में नुकसान नहीं होना चाहिए। युगलपीठ ने एकलपीठ के द्वारा पूर्व में पारित आदेश को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि मेरिट के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने वाले अपीलकर्ताओं को पसंद अनुसार पोस्टिंग प्रदान करने पर विचार किया जाये। संबंधित विभाग में उपलब्ध वैकेंसी के आधार पर एडजस्ट किया जाएगा। वैकेंसी उपलब्ध नहीं हैं, दो महीने के अंदर स्कूल चॉइस फिलिंग पॉलिसी के अनुसार उन्हें दूसरे डिपार्टमेंट में एडजस्ट किया जाएगा।
याचिकाकर्ता रामनाथ षाह व अन्य की तरफ से दायर की गयी अपील में कहा गया था कि प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी कल्याण विभाग में शिक्षण पदों पर नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा, 2018 आयोजित करने हेतु एक साझा विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया में परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों की मेरिट सूची तैयार करना, काउंसलिंग तथा उम्मीदवारों द्वारा चुने गए विकल्पों के आधार पर उपलब्ध पदों व स्कूलों का आवंटन शामिल था। भर्ती प्रक्रिया में शामिल पदों की संख्या अधिक होने के कारण दोनों विभागों की रिक्तियों को एक साझा चयन ढांचे के अंतर्गत लाया गया था। आरक्षित श्रेणियों से संबंधित कई उम्मीदवारों ने अनारक्षित श्रेणी में आने वाले उम्मीदवारों की तुलना में अधिक अंक प्राप्त किए थे। ऐसे उम्मीदवारों को मेरिट पर चयनित उम्मीदवार माना गया और उन्हें अनारक्षित व सामान्य रिक्तियों के विरुद्ध समायोजित किया गया। जिसमें से कई उम्मीदवारों को आदिवासी कल्याण विभाग के तहत स्कूल आवंटित किए गए। कई उम्मीदवारों ने अपनी प्राथमिकता में स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूलो का चयन किया था। उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूल आवंटित कर दिए गए।
अपील में कहा गया था कि संबंधित अधिकारियों ने 02 नवम्बर 2022 और 21 दिसम्बर 2022 को आदेश कर दिये कि स्कूल शिक्षा विभाग या आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति पा चुके उम्मीदवारों को खाली सीटों के लिए काउंसलिंग में रजिस्ट्रेशन करने की अनुमति नहीं दी गई। अपीलकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि भर्ती विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त नही थी। संबंधित अधिकारियों का यह कदम मूल चयन प्रक्रिया और मेरिट के सिद्धांतों के खिलाफ है। कम मेरिट वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग में नौकरी पाने की अनुमति दी गई है। मेरिट सूची में उपर होने के बावजूद भी अपीलकर्ताओं को मौके से वंचित कर दिया। जो और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन हुआ है।युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि रिकॉर्ड से इस बात की पुष्टि होती है कि कम योग्यता वाले उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग की काउंसलिंग में भाग लेने की अनुमति दी गई। अधिक योग्यता होने के बावजूद अपीलकर्ताओं को आदिवासी कल्याण विभाग में नियुक्ति प्रदान किये जाने के कारण यह मौका नहीं दिया गया। ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जा सकता ,जिसके परिणाम में अधिक योग्य उम्मीदवार को कम योग्य उम्मीदवार की तुलना में निचले स्थान पर रखा जाए।
