
इसके बाद उन्होंने वहां एक होटल में आयोजित चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक (आईएसएमआर) और चौथी भारत-सिंगापुर व्यावसायिक गोलमेज सम्मेलन (आईएसबीआर) में भाग लिया। इन बैठकों में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों तथा दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की गई। इसके बाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया गया।
मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक में भारत की ओर से वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, पीयूष गोयल और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल थे। सिंगापुर का प्रतिनिधित्व वहां के उप प्रधानमंत्री एवं व्यापार एवं उद्योग मंत्री गैन किम योंग, वरिष्ठ मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वय मंत्री एवं गृह मंत्री के. षणमुगम, विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालकृष्णन, डिजिटल विकास एवं सूचना मंत्री जोसेफिन तेओ तथा परिवहन मंत्री एवं वित्त राज्य मंत्री जेफ्री सिओ ने किया।
दोपहर में गोयल ने वैश्विक कारोबारी और संस्थागत समुदाय के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई सरकार-से-व्यवसाय (जी2बी) बैठकें कीं। इनमें ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क (जीएफटीएन) और केपेल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रतिनिधि शामिल थे। चर्चाओं में कृषि निर्यात, जीसीसी-आधारित वाणिज्यिक पार्क, फिनटेक और सतत बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत-सिंगापुर सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।
श्री गोयल ने सिंगापुर की विदेश मामलों तथा व्यापार एवं उद्योग राज्य मंत्री सुश्री गैन सिओ हुआंग के साथ सिटी स्क्वायर मॉल में एपीडा-फेयरप्राइस पहल का भ्रमण किया। इस कार्यक्रम ने भारत और सिंगापुर के बीच बढ़ते कृषि व्यापार और विस्तारित बाजार संपर्क को रेखांकित किया।
शाम को उन्होंने उद्योगमंडल फिक्की द्वारा आयोजित भारत-सिंगापुर व्यावसायिक मंच के सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने “भारत नई वैश्विक विकास समीकरण में: एशिया और विश्व में कारोबार के लिए विकास एवं अवसर” विषय पर आयोजित फायरसाइड चैट में भी हिस्सा लिया। इसके बाद कारोबारी समुदाय के सदस्यों के साथ प्रश्नोत्तर का एक संवादात्मक सत्र आयोजित हुआ।
इन सभी बैठकों और कार्यक्रमों ने भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी की मजबूत गति की पुनः पुष्टि की। साथ ही, इनसे व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी तथा बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) संपर्कों को और गहरा करने तथा दोनों देशों के लिए पारस्परिक लाभकारी विकास के नए अवसर पैदा करने की भारत की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट हुई।
