डॉक्टरों से नहीं करवा सकते बंधुआ मजदूर जैसे कार्य

जबलपुर। मेडिकल पीजी कोर्स करने के बाद पांच साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने का बांड भरवाये जाने के चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। बांड की शर्त अनुसार सेवा नहीं देने पर शैक्षणिक दस्तावेज लौटाने के एवज में पचास लाख रुपये जुर्माने के तौर में लिये जा रहे है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं के शैक्षणिक दस्तावेज तत्काल लौटाने के आदेश जारी किये है। अंतिम निर्णय याचिका के अधीन रहेंगी।

चिरायु मेडिकल कॉलेज से मेडिकल पीजी कोर्स करने वाले डॉ वैभव दुआ, पुष्पेन्द्र सिंह तथा पुलकित शर्मा की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि एमबीबीएस में दाखिला लेने पर कोर्स पूर्ण करने के बाद एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने का बांड भरवाया जाता है। मेडिकल पीजी में दाखिला लेने पर पांच साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देना का बांड भरवाया जाता है। शर्त पूरी नहीं करने के एवज में प्रदेश सरकार के द्वारा पचास लाख रुपये जुर्माने के तौर पर लिये जाते है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर शैक्षणिक दस्तावेज नहीं लौटाये जाते है।

याचिकाकर्ताओं की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि याचिकाकर्ता को चिरायु मेडिकल कॉलेज में साल 2022 में मेडिकल पीजी सीट में दाखिला मिला था। दो साल का कोर्स पूरा करने बाद उन्हें 9 माह बाद नौकरी प्रदान की गयी। एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लेने से लेकर पीजी कोर्स करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के दौरान ही छात्र की आयु 35 साल से अधिक हो जाती है। इसके बाद वह स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट का कोर्स करता है तो उसकी आयु 40 साल से अधिक हो जाती है। इस प्रकार छात्र की आधी से अधिक आयु शैक्षणिक काल में गुजर जाती है।

रूरल एरिया ब्रांड के संबंध में लोकसभा में प्रश्न उठा था। लोकसभा ने आदेश पर नेशनल मेडिकल कमीशन ने प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर रूरल बांड को औचित्यहीन बताया था। इसके अलावा यह भी कहा गया था कि डॉक्टरों ने बंधुआ मजदूरों की तरह से कार्य नहीं लिया जा सकता है। एनएमसी ने इस संबंध में नेशनल टास्ट फोर्स का गठन किया था। टास्ट फोर्स की रिपोर्ट के कारण ब्रांड के कारण ही छात्र डिप्रेशन में जाकर आत्महत्या करते है। याचिकाकर्ता वैभव दुआ ईडब्ल्यूएस वर्ग का छात्र है। लोन लेकर वह पढाई कर रहा है और उसकी स्थिति ऐसी नहीं है कि वह 50 लाख रुपये जुर्माने की तौर पर जाम कर सके। मजबूरन पांच साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के कारण आगे की पढाई प्रभावित होगी। युगल पीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किये।

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