नयी दिल्ली 25 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यों से आकांक्षी जिलों के साथ-साथ दूरदराज, आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया है।
श्री मोदी ने बुधवार को यहां प्रगति की 48वीं बैठक की अध्यक्षता की। प्रगति का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को एकीकृत करके सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने खान, रेलवे और जल संसाधन क्षेत्रों में कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा में समयसीमा, अंतर-एजेंसी समन्वय और समस्या समाधान पर ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि परियोजना निष्पादन में देरी से वित्तीय व्यय में वृद्धि और नागरिकों को आवश्यक सेवाओं और बुनियादी ढांचे तक समय पर पहुंच से वंचित करने की दोहरी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अवसर को जीवन में सुधार में बदलने के लिए परिणाम-संचालित दृष्टिकोण अपनाएं।
प्रधानमंत्री-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) की समीक्षा के दौरान, प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों से आकांक्षी जिलों के साथ-साथ दूरदराज, आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देते हुए स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरीब, हाशिए पर पड़े और वंचित आबादी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए और इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूदा अंतर को पाटने के लिए तत्काल और निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पीएम-एबीएचआईएम राज्यों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल और सेवाएं प्रदान करने के लिए ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर अपने प्राथमिक, तृतीयक और विशेष स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली अनुकरणीय प्रथाओं की समीक्षा की। उन्होंने इन पहलों की उनके रणनीतिक महत्व और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की उनकी क्षमता के लिए सराहना की। उनकी व्यापक प्रासंगिकता को रेखांकित किया और कहा कि स्वदेशी क्षमताओं के साथ निष्पादित ऑपरेशन सिंदूर की सफलता रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।
