
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी जब करियर की शुरुआत करें, तो उन्हें निरंतर सीखते और स्वयं को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढालते रहना चाहिए। प्रौद्योगिकी, मीडिया, अर्थव्यवस्था और लोक नीति की दुनिया तेजी से बदल रही है। उन्होंने उन्हें जिज्ञासु बने रहने, नयी दक्षताएं विकसित करने और अनुभव से सीखने की सलाह दी। उन्होंने अधिकारियों से निर्णयों में विवेकपूर्ण, आचरण में संवेदनशीलता के साथ-साथ सत्यनिष्ठा बनाये रखने में अडिग रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अधिकार अपने साथ निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ जनता की सेवा करने की गहन जिम्मेदारी भी लेकर आती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सूचना सेवा ने सरकार और नागरिकों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के लिए सूचना हासिल करने, साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया मंचों का उपयोग केवल सूचना देने और लोगों को जोड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि जनता की चिंताओं को सुनने, समझने और उनका समाधान करने के लिए भी करें। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में, जहां सूचना बहुत तेजी से प्रसारित होती है, उनके संचार में सदैव सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत वर्ष 2047 की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जायेगी, क्योंकि एक सुविज्ञ नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम होता है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि आंकड़ा-आधारित दुनिया में लोक नीति की गुणवत्ता काफी हद तक सटीक, समयबद्ध और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आंकड़ों , उनके विश्लेषण और व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो हमारे लाखों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों का आधार बनते हैं। उन्होंने कहा कि इस सेवा के अधिकारियों का कार्य अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण में सहायक होगा। उन्होंने उन्हें सदैव यह याद रखने की सलाह दी कि प्रत्येक आंकड़ा-संग्रह के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे आंकड़ों को नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए अधिक सुलभ बनाएं। आधुनिक, विश्वसनीय और प्रौद्योगिकी-सक्षम सांख्यिकीय तंत्र के निर्माण में उनका योगदान विकसित भारत की दिशा में भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
