जबलपुर: आजादी का जश्न मनाते है पर उसके साथ हमे विभाजन का यह संस्मरण भी याद रहता है कि लोगों ने अपने परिवार संपत्ति को खोया है, विभाजन की विभीषिका के संस्मरण को याद करते हुए जब हम मिलते है, उस समय के चित्र देखते है तब उस कालखंड की चीखें सुनाई देती हैं विभाजन के स्मरण से ही मन व्यथित हो जाता है, आजादी हमें मिली पर उसकी जो कीमत हमें चुकानी पड़ी है उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। यह बात मध्य प्रदेश शासन की लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में सरदार वल्लभभाई पटेल भवन में कहीं।
आगे उन्होंने कहा कि हम 15 अगस्त को पूरे आत्मविश्वास के साथ भारत माता के भविष्य की कामना करते हुए आजादी का जश्न मनाते हैं एवं उन महापुरुषों को याद करते है जिनका देश में योगदान है परंतु 14 अगस्त को विभाजन की विभीषिका का संस्मरण भी याद आते ही मन अत्यंत दुखी होता है। संगोष्ठी के पूर्व भारतीय जनता पार्टी जबलपुर महानगर द्वारा मालवीय चौक से विभाजन की विभीषिका की स्मृति में मौन जुलूस गया। जो मालवीय चौक से प्रारंभ होकर खंडेलवाल फर्नीचर होते हुए वंदे मातरम चौक पर समाप्त हुआ जुलूस में सभी ने पीडि़त पर परिवारों की स्मृति में मौन रखकर संवेदना व्यक्त की।
घर-बार छोडक़र विस्थापन का दंश झेलना पड़ा: आशीष-
सांसद आशीष दुबे ने कहा कि विभाजन की विभीषिका का दंश बहुत ही भयावह था देश को दो टुकड़ों में बांट दिया था हमने विभाजन में अपना भूभाग भी दिया और इसके बदले में हमें लाशें प्राप्त हुई लोग अपना सर्वस्व त्याग कर हिंदुस्तान में बसने के लिए आए ताकि उनकी पीढ़ी परिवार सुरक्षित रह सकें। भारत का विभाजन केवल देश की सीमाओं का विभाजन नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों के जीवन, परिवारों और भावनाओं पर गहरा आघात था। लाखों लोगों को अपना घर-बार छोडक़र विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। असंख्य लोगों ने अपने प्राण गंवाए और परिवार बिछड़ गए। विभाजन की इस त्रासदी को आने वाली पीढिय़ों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि समाज इतिहास से सीख लेकर राष्ट्र की एकता और अखंडता को और मजबूत कर सके।
एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता के लिए कार्य करें: रत्नेश
भाजपा अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य उन सभी पीडि़तों और विस्थापितों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य और राष्ट्रनिष्ठा का परिचय दिया। आज आवश्यकता है कि हम जाति, पंथ और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता के लिए कार्य करें। संगोष्ठी में उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले सभी नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया।
पीडि़त जनों का हुआ सम्मान, प्रदर्शनी का आयोजन
इस अवसर पर विभाजन पीडि़त परिवारों से निर्मल राज भाटिया,, विनोद कुमार तलरेजा, प्रदीप आहूजा, संजीव आनंद, विमल अरोरा, उद्धवदास परवानी का सम्मान मंच द्वारा किया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल भवन में संगोष्ठी के पूर्व विभाजन विभीषिका स्मृति पर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें उपस्थित जनों ने विभीषिका के संस्मरण को याद किया।
