
मांडू, कभी जैन धर्म की नगरी रहे मांडू में धर्म का प्राचीन वैभव पुन: स्थापित करने के लिए यहां पंचशिखारिया जिनालय लगभग तैयार हो चुका है। प्रतिष्ठा का भव्य महोत्सव 18 फरवरी 2027 को होगा। व्यापक तैयारी के दौर के बीच प्रेरणास्पद कार्य किया जा रहा है। साधार्मिक गरीब और अपेक्षित परिवारों को यहां व्यापार से जोडक़र उन्हें दान स्वरूप रहने के लिए आवाज भी दिए जाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। प्रामाणिक इतिहास के अनुसार कभी जैन इतिहास की समृद्ध नगरी रहे मांडू में प्राचीन वैभव फिर लौटेगा। यहां उड़ीसा के कलाकारों द्वारा तैयार किया जा रहे नयनाभिराम पंचशिखरीय जिनालय की प्रतिष्ठा को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू हो गई है। 16 अगस्त को मुंबई में मांडू तीर्थ के लिए चढ़ावे की झाझम सजेगी। मांडू जैन तीर्थ पर समाज के परिवारों को निशुल्क आवास एवं व्यापार से जोडऩे का पुण्य कार्य भी किया जा रहा है। मांडू जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश मुथा ने बताया कि कभी मांडू में 35 किमी के क्षेत्र में 700 जैन मंदिर थे। पेथडशाह का मांडू से जुड़ा इतिहास मिलता है। गधाशाह की दुकान आज भी ऐतिहासिक स्वरूप में है। मांडू में आसपास के क्षेत्र में जैन मूर्तियां भी निकलती रहती है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगामी 18 फरवरी को होने वाले प्रतिष्ठा महोत्सव का निमंत्रण दिया है। देश विदेश की बड़ी शख्सियत मांडू प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने जा रही है । इस जिनालय में जैन शासन की विभूतियां के साथ जैन धर्म की गौरवशाली गाथाओं को दर्शाया जाएगा ।
ट्रस्ट के घेवरचंद जैन एवं सुभाष -जैन ने बताया कि प्रसिद्ध सोमपुरा प्रणय त्रिवेदी के निर्देशन में उड़ीसा के कलाकारों द्वारा पंचशिखर नयनाभिराम जिनालय लगभग बनकर तैयार है। इसकी विशेषता यह है कि इस मंदिर में देलवाड़ा जैसी शिल्प कला से जिनालय को सजाया जा रहा है। महोत्सव परम पूज्य आचार्य भगवंत अशोक सागर महाराज साहब की मिश्रा में आयोजित किया जा रहा है जिसकी भव्य स्तर पर तैयारी की जा रही है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष मुथा ने बताया कि मांडू में जरूरतमंद साधार्मिक
परिवारों को निशुल्क आवास देने के साथ उन्हें व्यापार से जोडऩे के लिए पेथडशाह आजीविका एवं व्यापार केंद्र बनाया जाने का पुण्य काम भी किया जा रहा है। इस व्यापार केंद्र को लेकर और भी कई महत्वपूर्ण योजनाएं हमारे पास है जल्दी काम शुरू होगा।
’16 अगस्त को मुंबई में सजेगी चढ़ावे की जाजम’
ट्रस्टी प्रवीण गुप्ता ने बताया की प्रतिष्ठा महोत्सव की भव्य झाझम 16 अगस्त को मुंबई के विले पार्ले जैन संघ में आयोजित होगी। इसमें देश भर के भामाशाह और समाज श्रेष्ठि शामिल होंगे। समाज जनों को आयोजन की रूपरेखा से अवगत करवाया जाएगा। मांडू में पिछले 6 महीना से इस भव्य समारोह को लेकर तैयारियां की जा रही है।मांडू को कभी मंडपाचल दुर्ग कहा जाता था। प्रामाणिक इतिहास के अनुसार 35 किलोमीटर क्षेत्र में 700 जैन मंदिर थे और एक लाख जैन परिवार निवास करते थेसाधार्मिक वात्सल्य की परंपरा यहां रही है । यहां आने वाले नए जैन परिवार को हर एक घर से एक स्वर्ण मुहर और एक ईट दी जाती थी। उद्देश्य था कि नया परिवार पहले ही समृद्ध होकर अपना घर बना सके।
01.मांडू में तैयार हो रहा भव्य पंच शिखारिय जिनालय।
