
सिंगरौली । चितरंगी क्षेत्र के बर्दी स्थित राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह शासकीय जूनियर बालक छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने भोजन और छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर शिकायतें सामने रखी हैं। छात्रों का आरोप है कि निर्धारित मीनू और उन्हें परोसे जा रहे भोजन में जमीन-आसमान का अंतर है। इससे छात्रावास में बच्चों के भोजन, पोषण और प्रबंधन की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
छात्रों के मुताबिक भोजन में चावल, दाल, सब्जी और रोटी तो परोसी जाती है, लेकिन दाल और सब्जी की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। दाल में पानी अधिक होने और सब्जी भी पतली होने का आरोप लगाया गया है। छात्रों का कहना है कि भोजन की स्थिति से परेशान होकर कई बार उन्हें घर जाकर खाना पड़ता है। मीनू में शाम के नाश्ते के लिए भुना चना, तला चना और मुरमुरे सहित अन्य सामग्री का प्रावधान बताया गया है। छात्रों का आरोप है कि निर्धारित नाश्ता और विशेष डाइट नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मीनू और छात्रावास की वास्तविक व्यवस्था में इतना अंतर क्यों है। छात्रों ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई किये जाने की मांग की है और यह भी कहा है कि जनप्रतिनिधियों से न्याय की उम्मीद नही की जा सकती है।
छात्रों के आरोपो की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर विभाग में विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले बैढ़न अजा कन्या छात्रावास की छात्राओं ने भी अधीक्षक और उनके पति पर गंभीर आरोप लगाए थे। लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो विभागीय निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब मांग उठ रही है कि बर्दी छात्रावास का तत्काल औचक निरीक्षण कर स्टॉक रजिस्टर, खाद्यान्न की उपलब्धता, खरीद बिल, भुगतान रिकॉर्ड और मीनू का छात्रों को दिए जा रहे भोजन से मिलान कराया जाए। साथ ही छात्रों के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। बच्चों के भोजन और पोषण से जुड़ा मामला है, इसलिए शिकायतों को कागजी खानापूर्ति तक सीमित रखने के बजाय जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
छात्रों ने लगाया अधीक्षक पर अभद्रता के आरोप
छात्रों ने अधीक्षक पर भोजन व्यवस्था को लेकर सवाल पूछने पर कथित तौर पर गाली-गलौज और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं छात्रों का दावा है कि भोजन को लेकर सवाल करने पर अधीक्षक की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि पैसा नहीं आ रहा और वे अपनी जेब से बच्चों को खाना खिला रहे हैं। यदि यह दावा सही है तो विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि छात्रावास के लिए आवंटित राशि और खाद्यान्न की व्यवस्था कहां अटक रही है।
