80 साल पुराना भोपाल… भोपाली की जुबानी सुनिए आजादी के दौर की कहानी

भोपाल। भोपाल की पहचान सिर्फ उसकी झीलों और इमारतों से नहीं, बल्कि उन गलियों और किस्सों से भी है, जो आज भी शहर के इतिहास को जिंदा रखे हुए हैं। पुराने भोपाल की ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहर है शौकत महल। इसी महल में जन्मे तारिक मिर्जा ने पुराने भोपाल के उस दौर को याद किया, जब शहर छोटा था, शहरपनाह की दीवारों के भीतर बसा था और आजादी का जश्न लोगों ने सड़कों पर निकलकर मनाया था।

तारिक मिर्जा बताते हैं कि उनका जन्म साल 1960 में इसी शौकत महल में हुआ। उनके मुताबिक यह महल कभी नवाबों का महल हुआ करता था, लेकिन बाद में परिवार और रिश्तेदारों के बीच इसके अलग-अलग हिस्से बंट गए।

आजादी के दौर में सड़कों पर था जश्न

आजादी के समय के भोपाल को याद करते हुए तारिक मिर्जा बताते हैं कि उस दौर में भोपाल आज के मुकाबले बहुत छोटा था। शहरपनाह की दीवार के भीतर ही अधिकांश भोपाल बसा हुआ था और आबादी भी कम थी।

उनके मुताबिक आजादी मिलने की खुशी में लोग घरों से निकलकर सड़कों पर आए। अलग-अलग जगहों पर मुशायरे हुए, आजादी के गीत गाए गए और लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर खुशी जाहिर की। उनके शब्दों में, उस समय लोगों के लिए आजादी किसी अजूबे से कम नहीं थी।

पटियों पर सजती थी भोपाल की महफिल

पुराने भोपाल की पहचान रहे पटियों का जिक्र करते हुए तारिक मिर्जा बताते हैं कि यह परंपरा आज भी शहर में दिखाई देती है। लोग पटियों पर बैठकर बातचीत करते हैं, किस्से सुनाते हैं और शतरंज खेलते हैं।

उनके मुताबिक पुराने समय में घरों में दोस्तों के साथ बैठने के लिए अलग जगह नहीं हुआ करती थी। घर छोटे होते थे और अलग-अलग हिस्से होते थे। ऐसे में लोगों ने घरों के बाहर पटिए लगा लिए, जहां चार-पांच लोग बैठकर बातचीत कर सकें।

यही पटिए धीरे-धीरे पुराने भोपाल की सामाजिक जिंदगी का हिस्सा बन गए। यहां बैठकर लोग अपने अनुभव, शिकार के किस्से और शहर से जुड़ी बातें साझा किया करते थे।

नया भोपाल बना, लेकिन पुराना भोपाल दिल में रह गया

समय के साथ भोपाल का विस्तार हुआ और नया भोपाल प्लानिंग के तहत विकसित हुआ। लेकिन तारिक मिर्जा के लिए पुराने भोपाल की जगह कोई और नहीं ले सकी।

वह बताते हैं कि उन्होंने कई बार पुराने भोपाल से बाहर घर लेने के बारे में सोचा, लेकिन बचपन से लेकर उम्र के इस पड़ाव तक जिस जगह से लगाव रहा, उसे छोड़ना आसान नहीं था।

उनके लिए घर से बाहर निकलते ही इकबाल मैदान, इब्राहिमपुरा और हमीदिया जैसी जगहों का नजर आना पुराने भोपाल की उस पहचान का हिस्सा है, जो अब उनकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

पुराना भोपाल आज बदल रहा है, लेकिन उसकी गलियों, पटियों और ऐतिहासिक इमारतों में आज भी बीते दौर की कहानियां मौजूद हैं। शौकत महल से जुड़ी तारिक मिर्जा की यादें भी इसी विरासत का हिस्सा हैं—एक ऐसा भोपाल, जहां आजादी की खुशी सड़कों पर दिखाई देती थी और जहां पटियों पर बैठकर शहर की महफिलें सजती थीं।

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