दान योग्य पात्र को एवं योग्य कारण के लिए देना चाहिए: ऐलक श्री आदर्श सागर

सागर। श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर अंकुर कॉलोनी में विराजमान ऐलक श्री 105 आदर्श सागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए अपने प्रवचन में कहा कि दान, योग्य पात्र को एवं योग्य कार्य के लिए देना चाहिए। उन्होंने दाता के सात गुण श्रद्धा, शक्ति, भक्ति, विवेक, संतोष, क्षमा एवं त्याग में से श्रद्धा का अर्थ बतलाते हुए कहा की जिनेंद्र भगवान द्वारा कहे गए तत्वों पर विश्वास करना, किंचित मात्र भी शंका नहीं करना, ही श्रद्धा कहलाता है। ऐलक श्री ने कहा की साधु को आहार देते समय पूरी श्रद्धा भक्ति से आहार देना चाहिए तभी वह आहार साधु की तपस्या में साधक बनता है, एवं देने वाले को अतिशय पुण्य की प्राप्ति होती है।

मन में गहरी पवित्र भावना का उदाहरण समझाते हुए उन्होंने कहा कि एक मेंढक मुंह में कमल की पंखुड़ी दबा करके भगवान महावीर स्वामी के समवशरण में उनके दर्शन करने, उनके वचनों को सुनने, उनके चरणों में पंखुड़ी समर्पित करने के भाव से जा रहा था, उसकी भावना बहुत ही पवित्र थी, प्रबल थी, रास्ते में वह हाथी के पैर के नीचे दबकर मरण को प्राप्त हो जाता है और उसकी पवित्र भावना के कारण वह मरकर स्वर्ग में देव गति को प्राप्त होता है और भगवान महावीर के समवशरण में देव के रूप में उपस्थित हो जाता है। समवशरण के सभी जीव उसके रूप वैभव को देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं, हमें भी देव शास्त्र गुरु के प्रति भावनाएं पवित्र रखना चाहिए, क्योंकि भावना ही भव को नाश करने वाली होती है। ऐलकश्री के मंगल प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से अंकुर कॉलोनी में चल रहे हैं।

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