नई दिल्ली, केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में मनरेगा का नाम बदलकर लागू की गई ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) के शुरुआती आंकड़े चिंताजनक हैं। जुलाई 2026 में इस योजना के तहत केवल 7.67 करोड़ पर्सन-डे सृजित हुए, जो पिछले साल इसी महीने मनरेगा के तहत दर्ज 15.33 करोड़ पर्सन-डे से लगभग 50 प्रतिशत कम है।
ग्रामीण परिवारों की भागीदारी पर असर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जुलाई में रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या में 51.45 फीसदी की भारी कमी आई है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम है। जानकारों का मानना है कि खराब मॉनसून और खरीफ बुवाई के मौसम में तकनीकी बदलाव के कारण रोजगार मिलने की गति धीमी हुई है, जिसका असर ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।
मंत्रालय का स्पष्टीकरण और सरकारी दावे
दूसरी ओर, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि नई योजना को देशभर में बिना किसी रुकावट के सफलतापूर्वक लागू किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹95,692 करोड़ का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया गया है और रोजगार मांगने वाले 98% से अधिक परिवारों को काम मुहैया कराया जा रहा है।

