भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनने जा रही है, जब राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) से पदोन्नत होकर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में आए किसी अधिकारी के पास पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) का पद नहीं रहेगा. 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी और सागर जोन के आईजी मिथिलेश कुमार शुक्ला के 30 अगस्त को सेवानिवृत्त होने के बाद सितंबर से दिसंबर 2026 तक करीब 122 दिनों के लिए आईजी स्तर पर एसपीएस कोटे का प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा. वर्ष 2026 की शुरुआत में ऐसे पांच अधिकारी आईजी स्तर पर पदस्थ थे. इनमें 2004 बैच के संजय तिवारी व 2006 बैच के हिमानी खन्ना, अंशुमान सिंह और अरविंद सक्सेना सेवानिवृत्त हो चुके हैं. अब शुक्ला के रिटायर होने के बाद इस श्रेणी का कोई अधिकारी आईजी नहीं रहेगा. शुक्ला की सेवानिवृत्ति के बाद प्रदेश में आईजी स्तर के अधिकारियों की संख्या घटकर 16 रह जाएगी. इनमें 1999 बैच के निरंजन ब्यांगंकर सबसे वरिष्ठ होंगे. इसके अलावा 2002 बैच के अभय सिंह, 2003 बैच के हरिनारायणाचारी मिश्र व अनुराग, 2004 बैच के गौरव राजपूत, इरशाद वली व सुशांत सक्सेना तथा 2005 बैच के डॉ. आशीष समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं. अधिकारियों के अनुसार जनवरी 2027 में प्रस्तावित पदोन्नति प्रक्रिया के बाद एसपीएस से आईपीएस बने वरिष्ठ अधिकारियों को आईजी पद पर पदोन्नति मिल सकती है. इससे चार महीने का यह अंतर समाप्त हो जाएगा.
अगस्त में चार वरिष्ठ आईपीएस होंगे सेवानिवृत्त
अगस्त के अंत में प्रदेश पुलिस के चार वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे. इनमें 1989 बैच के अजय कुमार शर्मा, 1994 बैच के विशेष पुलिस महानिदेशक आशुतोष राय, 1995 बैच के एडीजी एवं खुफिया शाखा प्रमुख ए. साई मनोहर और 2006 बैच के आईजी मिथिलेश शुक्ला शामिल हैं. इस साल कुल 16 आईपीएस अधिकारियों की सेवानिवृत्ति प्रस्तावित है, जिनमें 11 अब तक रिटायर हो चुके हैं. शर्मा के रिटायर होने के बाद पुलिस आवास निगम में नई पदस्थापना की संभावना है. वहीं साई मनोहर की सेवानिवृत्ति के बाद खुफिया शाखा का पद तत्काल भरे जाने की उम्मीद है, ताकि यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक दिन के लिए भी खाली न रहे.
