नयी दिल्ली, (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस नेता एवं सांसद अभिषेक बनर्जी को सितंबर में तीन सप्ताह के लिए विदेश जाकर अपनी आंख का इलाज कराने की सोमवार को यह मानते हुए इजाजत दे दी कि हर व्यक्ति को विदेश यात्रा करने और अपना इलाज चुनने का अधिकार है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने श्री बनर्जी की याचिका को मंज़ूरी देते हुए कहा, “हर व्यक्ति को विदेश यात्रा करने का अधिकार है। हर व्यक्ति को अपना इलाज चुनने का अधिकार है।”
न्यायालय ने श्री बनर्जी को अपने डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर तीन सपतह की यात्रा करने की इजाजत देते हुए उन्हें जांच एजेंसी को अपनी यात्रा का पूरा ब्यौरा देने का निर्देश दिया। इसमें विदेश में उनके रहने की जगह, उन डॉक्टरों और अस्पताल की जानकारी जहाँ वे इलाज कराना चाहते हैं, उनके वहाँ रहने की अवधि और उनकी फ्लाइट की जानकारी शामिल होनी चाहिए।
पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि श्री बनर्जी की अपनी विदेश यात्रा के बारे में दी गयी जानकारी का इस्तेमाल जांच एजेंसी केवल अपने मकसद के लिए करेगी और इसे गोपनीय रखा जायेगा।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने श्री बनर्जी को ‘फ्लाइट रिस्क’ (देश छोड़कर भागने का जोखिम) बताया और उनके खिलाफ दर्ज 15 आपराधिक मामलों का ज़िक्र किया।
श्री बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताट गोपाल शंकरनारायणन ने इस दलील का जवाब देते हुए कहा कि ये सभी मामले पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद दर्ज किये गये थे। उन्होंने कहा कि श्री बनर्जी सांसद और एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के महासचिव हैं और वे अपने डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर यात्रा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्री बनर्जी के पास कोई दूसरा पासपोर्ट नहीं है।
श्री शंकरनारायणन की इस दलील के जवाब में कि सरकार बदलने से पहले श्री बनर्जी के ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, श्री राजू ने तर्क दिया कि पिछली सरकार के समय श्री बनर्जी बहुत ताकतवर व्यक्ति थे और तब किसी की हिम्मत नहीं थी कि उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करे।
श्री बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारागत पांच अगस्त को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगने वाली उनकी याचिका खारिज किये जाने के बाद शीर्ष न्यायालय का रुख किया था।
