दूसरा अंकः जब शब्द जीवन को टूटने से बचाते हैं

इंदौर: 21 वीं सानंद नाट्य स्पर्धा के छठवें दिन सार्थक सांस्कृतिक कला संस्था ने नाटक ‘दूसरा अंक’ का प्रभावी मंचन किया. इसके लेखक रविशंकर झिंगरे और दिग्दर्शक सतीश मुंग्रे हैं. दूसरा अंक केवल एक लेखक की कहानी नहीं, बल्कि उस संवेदनशील मनुष्य की यात्रा है, जो जीवन की तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी रचनात्मकता का दामन नहीं छोड़ता.
नाटक कलाकार के भीतर चलने वाले उस द्वंद्व को प्रभावी ढंग से सामने लाता है, जहां एक ओर सपने और सृजन हैं तो दूसरी ओर परिवार, आर्थिक संकट और स्वास्थ्य जैसी कठोर वास्तविकताएं. नाटक का केंद्रीय पात्र उल्हास कोळी बैंक में नौकरी करने वाला एक सामान्य व्यक्ति है, लेकिन उसके भीतर एक असाधारण लेखक सांस लेता है.

उसके लिए लेखन महज शौक नहीं, बल्कि जीवन की जरूरत है. परिस्थितियां जब लगातार उसके सामने दीवारें खड़ी करती हैं, तब सवाल उठता है कि क्या रचनात्मकता इन दीवारों को पार कर सकती है? ‘दूसरा अंक’ इसी सवाल को बेहद मानवीय ढंग से टटोलता है. रविशंकर झिंगरे की लेखनी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने कथा को केवल संघर्ष की कहानी बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि कलाकार के मनोविज्ञान और उसके रिश्तों की बारीकियों को भी शब्द दिए हैं. संवाद सहज हैं, लेकिन उनके भीतर विचार और संवेदना की गहराई है. नाटक का शीर्षक भी अपने आप में अर्थपूर्ण है कि मानो जीवन का पहला अंक चाहे जितना कठिन रहा हो, कहानी अभी खत्म नहीं हुई है.
निर्देशक सतीश मुंग्रे ने लेखक की संवेदना को मंच पर सधे हुए ढंग से रूपांतरित किया है. पात्रों के बीच संबंधों की गर्माहट, तनाव और अंतर्द्वंद्व को उन्होंने अनावश्यक नाटकीयता से बचाते हुए प्रस्तुत किया है। मंच पर गति और ठहराव का संतुलन नाटक के प्रभाव को बढ़ाता है.
उल्हास के जीवन में नेत्रा का किरदार रिश्तों में विश्वास और सहारे का प्रतीक है, जबकि जयराम मित्रता और प्रेरणा की ताकत बनकर सामने आता है। वहीं नाथा व्यावसायिक दुनिया की व्यावहारिकता और उसकी कठोर सच्चाइयों का प्रतिनिधित्व करता है. इन पात्रों के माध्यम से नाटक कलाकार के अकेले संघर्ष को सामूहिक अनुभव में बदल देता है.

‘दूसरा अंक’ अंततः यही कहता है कि जीवन चाहे जितनी बार हमें तोड़ने की कोशिश करे, सृजन की एक छोटी-सी लौ भी भीतर बची रहे तो कहानी का अगला अंक लिखा जा सकता है।

कलाकार –

समीर कोरडे, धवल वैद्य, विनय बोकिल, दिक्षा वडनेरकर, राशि वडनेरकर, यश एरंडोलकर

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