आरएसएस के खिलाफ कानूनी दायरे में रहकर कार्रवाई करेगी कर्नाटक सरकार : प्रियांक खरगे

बेंगलुरु, 08 अगस्त (वार्ता) कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के इतिहास और कामकाज का अध्ययन करने के बाद कानूनी दायरे के भीतर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी। हालांकि, उन्होंने सरकार की प्रस्तावित रणनीति का खुलासा करने से इनकार कर दिया।

यहां संवाददाताओं से बातचीत में श्री खरगे ने कहा कि संगठन के पंजीकरण सहित विभिन्न मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखे गये पत्र का जवाब न मिलने के बावजूद सरकार अपनी योजना के अनुसार आगे बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, “मैंने आपसे कहा था कि जवाब नहीं आयेगा। मैंने यह भी कहा था कि हम इससे ठीक से निपटेंगे। हम जो कुछ भी करेंगे, वह कानूनी दायरे में रहकर ही किया जायेगा।”

श्री खरगे ने दावा किया कि आरएसएस “कानूनी ढांचे से बाहर” है और सरकार उसे कानून के दायरे में लाने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई तय करने से पहले सरकार को संगठन और उसके ‘100 साल के इतिहास’ का अध्ययन करने के लिए समय चाहिए।

श्री भागवत की ओर से जवाब न मिलने की स्थिति में सरकार के अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि सरकार अपनी योजना पर आगे बढ़ेगी, लेकिन उन्होंने ब्यौरा साझा नहीं किया।

उन्होंने कहा, “हां, हम आगे बढ़ेंगे। मैंने आपको पहले ही यह बता दिया है।” उन्होंने कहा कि अपनी योजनाओं का पहले से खुलासा करने से ‘सरप्राइज एलिमेंट’ और कानूनी रणनीति का असर खत्म हो जायेगा।

श्री खरगे ने देशभक्ति या देशद्रोह के प्रमाण पत्र जारी करने के आरएसएस के अधिकार पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जो संगठन खुद पंजीकृत नहीं है, वह यह कैसे तय कर सकता है कि कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही।

उनके ये बयान आरएसएस के पंजीकरण और उसकी गतिविधियों को लेकर कर्नाटक में जारी राजनीतिक बहस के बीच आये हैं, जहां राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि उसके अगले कदम कानूनी जांच-पड़ताल पर आधारित होंगे।

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