मध्य प्रदेश के दिल में बसा इंदौर अपनी साफ-सफाई, बेहतरीन खानपान और समृद्ध इतिहास के कारण केवल मालवा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश की शान है. अहिल्याबाई होलकर की इस नगरी को उसकी अनूठी संस्कृति, व्यापार और आतिथ्य के लिए जाना जाता है. शहर का गौरवशाली इतिहास होलकर वंश और खासकर लोकमाता अहिल्याबाई के शासन से जुड़ा है, जिन्होंने यहाँ न्याय और विकास की मिसाल कायम की.
देवी अहिल्याबाई की इस पावन नगरी ने अपनी निष्ठा, अनुशासन और सामुदायिक भावना के बल पर देश में स्वच्छता का परचम बार-बार फहराया है. इंदौर के नागरिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब संकल्प सामूहिक हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता. इंदौर के इस स्वच्छता-इतिहास को लिखने में यहाँ की नारी-शक्ति का योगदान उल्लेखनीय है. घर के साथ-साथ शहर की स्वच्छता में उनके योगदान को याद किए बिना यह विवरण अधूरा रहेगा. महिलाओं ने ही जागरूकता के साथ कचरे को गीला और सूखा अलग-अलग व्यवस्थित रखने से लेकर शहर की स्वच्छ छवि उकेरी है. इंदौर में महिलाओं की साक्षरता दर लगभग 74′ से अधिक है, जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है.
लेकिन किसी भी ऐतिहासिक शहर की यात्रा किसी एक पड़ाव पर नहीं ठहरती. अब समय आ गया है कि हम स्वच्छता के शिखर से आगे बढ़ें और ‘स्मार्ट इंदौर’ को ‘संवेदनशील और आत्मनिर्भर इंदौर’ के रूप में पुनर्गठित करें.
एक कामकाजी महिला और जागरूक नागरिक के दृष्टिकोण से, इंदौर का अगला स्वर्णिम अध्याय केवल गगनचुंबी इमारतों या तकनीकी पार्कों से नहीं लिखा जाएगा; बल्कि इस बात से तय होगा कि हम अपनी आधी आबादी को कितनी सुरक्षा, अवसर और सम्मान दे पाते हैं. यह शहर अहिल्याबाई का शहर है. इस क्षेत्र में स्त्री-शक्ति की मिसाल लोकमाता ने ही कायम की थी. वर्षों से यह शहर महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य-क्षेत्र रहा है, लेकिन विकास की अंधी दौड़ में बहुत कुछ पीछे भी छूट जाता है. देवी अहिल्याबाई होलकर ने सदियों पहले सुशासन, महिला-सहभागिता और लोक-कल्याण का जो मानदंड स्थापित किया था, उसी रूपरेखा पर और उसी विरासत को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाने के लिए विचार किया जाना चाहिए.
एक बार फिर शहर का विकास इस दृष्टि से हो कि शहर की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की सीधी, सक्रिय और सम्मानजनक भागीदारी उभरकर सामने आए। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक यह शहर पूरी तरह से समृद्ध नहीं कहला सकेगा। आज इंदौर की महिला उद्यमियों, कारीगरों और कामकाजी बहनों को केवल अवसर ही नहीं, बल्कि एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) की आवश्यकता है.
अब समय आ गया है कि शहर अपनी आधी आबादी को साथ लेकर आगे बढ़े और स्मार्ट इंदौर को स्त्री-सशक्त अहिल्या नगर इंदौर के रूप में विकसित करे, ताकि लोकमाता अहिल्या का यह शहर स्त्री-शक्ति की उद्यमिता में भी शिखर पर स्थापित हो सके.
— डॉ. स्वाति तिवारी, इंदौर
