कीव, (वार्ता) रूस यूक्रेन पर हमला करने के लिए तीव्र गति वाली बैलिस्टिक मिसाइलों पर ज़्यादा निर्भर हो रहा है। वह कीव के वायु रक्षा प्रणाली की एक बड़ी कमज़ोरी का फ़ायदा उठा रहा है जो कि ऐसे हथियारों को नष्ट करने में सक्षम इंटरसेप्टर्स की कमी है।
हालांकि हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के अंदर तेल रिफाइनरियों, ईंधन से जुड़ी अवसंरचना एवं रसद केंद्र को निशाना बनाते हुए लंबी दूरी के हमले तेज़ कर दिए हैं लेकिन मास्को ने भी ज़्यादा आधुनिक मिसाइलों और ड्रोनों से लगातार हमले करके इसका जवाब दिया है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों का सबसे खतरनाक पहलू बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल है, जो बहुत तेज़ रफ़्तार से चलती हैं और अक्सर आम नागरिकों को संभलने का बहुत कम या बिल्कुल भी मौका नहीं देतीं।
इस हफ़्ते की शुरुआत में, रूस ने एक ही रात में कीव इलाके पर दो दर्जन से ज़्यादा बैलिस्टिक और जहाज-रोधी मिसाइलें दागीं। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इनमें से किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल को रोका नहीं जा सका। इस हमले में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।
यूक्रेन की वायु रक्षा को नाकाम करने के लिए रूस लंबी दूरी के हमलों में कई तरह के हथियारों का इस्तेमाल करता है। यूक्रेनी वायु सेना के अनुसार, 30 जून को हुए हमले में मास्को ने चार जहाज-रोधी मिसाइलें, नौ बैलिस्टिक मिसाइलें, 61 क्रूज़ मिसाइलें और लगभग 300 अटैक ड्रोन दागे।
ड्रोन या क्रूज़ मिसाइलों के विपरित बैलिस्टिक मिसाइलें रॉकेट इंजन से प्रक्षेपित होने के बाद एक तीव्र ढ़लान वाले चाप में चलती हैं और ध्वनि की गति से कई गुना तेज़ी से अपने टारगेट की ओर नीचे आती हैं।
