श्योपुर:भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाले स्ट्रैटोस्फेरिक एयरशिप अब फिर से श्योपुर के आसमान में उड़ान भर रहे हैं। डीआरडीओ ने इस अत्याधुनिक जासूसी बैलून के नए परीक्षण शुरू किए हैं, जिनके तहत दो बैलून कराहल क्षेत्र में गिरे। प्रशासन ने पूर्व सूचना जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी थी, इसलिए कोई हड़कंप नहीं मचा। यह ट्रायल मई 2025 के सफल परीक्षण का अगला चरण है, जब एयरशिप ने 17 किमी ऊंचाई पर 62 मिनट तक स्थिर रहकर अपनी क्षमता दिखाई थी।
अब जाखदा जागीर स्थित नई साइट से 11 से 26 अक्टूबर तक होने वाले ट्रायल में इसके सेंसर, डेटा कलेक्शन और लंबी अवधि की उड़ान का मूल्यांकन होगा।
यह हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सैटेलाइट से 10 गुना सस्ता और ड्रोन से अधिक प्रभावी है, जो हफ्तों तक एक जगह रहकर निगरानी कर सकता है। सीमाओं पर सुरक्षा से लेकर आपदा प्रबंधन और जंगलों की आग तक, यह तकनीक गेम-चेंजर साबित होगी।
चीतों के बाद अब रक्षा प्रौद्योगिकी से पहचान बना रहा श्योपुर, 1200 हेक्टेयर में फैली डीआरडीओ साइट के जरिए भारत का नया “एरिया 51” बनकर उभर रहा है।अर्पित वर्मा, कलेक्टर श्योपुर ने बताया कि डीआरडीओ के परीक्षण चल रहे हैं। डीआरडीओ ने परीक्षण को लेकर सूचना दी थी जिसको लेकर कराहल क्षेत्र के लिए गाइडलाइन जारी की गई है। इसमें कुछ भी घबराने जैसा नहीं है, सबकुछ नियंत्रित है। लोगों को इस संबंध में पूर्व से डीआरडीओ से मिली जानकारी के आधार पर सूचना दी जा चुकी है
