सतत विकास बना फिनटेक की सबसे बड़ी ताकत, बोले फटाकपे के MD अमित गोयल

  • सतत विकास क्यों आजकल फिनटेक कंपनियों की सबसे बड़ी ताक़त बनता जा रहा है

अमित गोयल, को-फ़ाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, फटाकपे

सालों तक, भारत का स्टार्ट-अप इकोसिस्टम सुर्खियों में रहा जिसमें ज़्यादातर टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियाँ शामिल थीं, क्योंकि उन्होंने विकास का वादा किया और काफी बड़े स्तर पर काम करके दिखाया। इसकी वजह से फंडिंग मिलना और नए ग्राहक बनाना ही सफलता का पैमाना बन गया था। फिर साल 2020 में कोविड-19 महामारी आ गई।

तब से लेकर अब तक स्टार्टअप की दुनिया में बहुत बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। हमने कई एडटेक और नए जमाने की कंपनियों को कामयाबी की बुलंदियों तक पहुँचते और रातों-रात बर्बाद होते देखा है। जिस इकोसिस्टम में कभी सिर्फ कंपनियों के बड़े आकार और बड़े पैमाने पर विस्तार का जश्न मनाया जाता था, आज उसे इस कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है कि आखिर में जो बच गया वही सही है!

इससे साबित होता है कि समझदारी भरा और लंबे समय तक चलने वाला विकास ही आगे बढ़ने का इकलौता रास्ता है। और आज फिनटेक इकोसिस्टम इसका बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे काम में आने वाली और लंबे समय के लिए बनाई गई योजनाओं के दम पर ही असली कामयाबी हासिल की जा सकती है।

धीरे-धीरे विकसित होता इकोसिस्टम

माना जाता है कि भारत का डिजिटल फाइनेंस इकोसिस्टम दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहे इकोसिस्टम में से एक है। JAM ट्रिनिटी और इंडिया स्टैक जैसी पहलों ने फाइनेंशियल सेक्टर में बड़े बदलाव की एक नई लहर पैदा की है। पिछले कुछ सालों में, फिनटेक कंपनियों ने डिजिटल लोन, स्मॉल पेमेंट बैंक और ‘अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें’ (बाय नाउ, पे लेटर) जैसी सेवाओं के ज़रिए भारत के इस डिजिटल बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। हालाँकि, फिनटेक इंडस्ट्री को अब यह बात अच्छे से समझ आ गई है कि सिर्फ़ बड़े पैमाने पर विस्तार और तेज़ी से आगे बढ़ने पर ध्यान देना ही काफ़ी नहीं है।

पिछले एक दशक या उसके आसपास आए बदलावों, खासकर 2016 में नोटबंदी और महामारी जैसी बड़ी घटनाओं ने इस इंडस्ट्री को पहले से ज्यादा समझदार बना दिया है। यही वजह है कि अब बोर्डरूम, निवेशकों की बैठकों और नियम बनाने वाले संस्थानों में होने वाली बातचीत का अंदाज़ बदल गया है।अब कंपनियों के मूल्यवान होने के साथ-साथ उनका टिके रहना भी उतना ही ज़रूरी हो गया है। ज़ाहिर है कि अब निवेशकों ने पैसे लगाने में ज्यादा समझदारी दिखानी शुरू कर दी है। 2021 की दूसरी छमाही में 5.5 बिलियन डॉलर की जबरदस्त फंडिंग के मुकाबले, भारत के फिनटेक सेक्टर ने 2025 की पहली छमाही में 889 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की। निवेशक साफ तौर पर ऐसे बिजनेस को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनकी यूनिट इकोनॉमिक्स मजबूत हो, जो सोच-समझकर आगे बढ़ रहे हों और जिनके मुनाफे की योजना बिल्कुल साफ हो। इससे जाहिर है कि फिनटेक सहित भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में सफलता को मापने का पैमाना बदल गया है।

साफ़ है कि जो फ़िनटेक कंपनियाँ मैराथन की तरह लंबी दौड़ की तैयारी के साथ मैदान में उतरती हैं, उन्हें जल्दबाज़ी में आगे बढ़ने की कोशिश करने वाली कंपनियों के मुकाबले ज़्यादा सफलता मिल सकती है। इस क्षेत्र से जुड़े लोग भी अब इस बात को मानने लगे हैं।

स्थिरता ही मायने रखती है

निवेशक अब बिज़नेस के बुनियादी पहलुओं और लंबे समय तक कायम रहने वाले फायदे पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं। दूसरी तरफ, ग्राहक भी यह परख रहे हैं कि वे अपनी बचत, लोन और पैसों से जुड़ी जानकारी के मामले में किस प्लेटफ़ॉर्म पर भरोसा कर सकते हैं। इसी तरह, नियम तय करने वाले संस्थान भी यह जानना चाहते हैं कि ग्राहकों के हितों की रक्षा कैसे की जा रही है।

बदलते इकोसिस्टम के साथ नियम तय करने वाले संस्थानों की अपेक्षाओं में भी बदलाव आया है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का उद्देश्य ज़िम्मेदार, पारदर्शी और मजबूत व्यवसायों को बढ़ावा देना है। इसी को ध्यान में रखते हुए, RBI ने पूरे फाइनेंस सेक्टर में बेहतर कामकाज, ग्राहकों की सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और काम चालू रखने की क्षमता को मजबूत बेहतर बनाने पर ज़्यादा ध्यान देना शुरू किया है।

इसीलिए, नियमों का बेहद अच्छे से पालन करने वाली फिनटेक कंपनियाँ सिर्फ सुर्खियों में ही नहीं रहतीं, बल्कि हितधारकों का भरोसा भी जीतती हैं। नियम बनाने वाले संस्थाओं और निवेशकों के साथ-साथ, ग्राहक भी अहम हितधारक होते हैं। अब फिनटेक कंपनियाँ अपने ग्राहकों से जुड़ने के लिए ज्यादा समझदारी भरे और उद्देश्यपूर्ण तरीके अपना रही हैं। सिर्फ इंसेंटिव, डिस्काउंट और प्रमोशनल ऑफर्स के दम पर चलने वाली रणनीतियों का दौर अब खत्म हो गया है। बेशक, उन रणनीतियों ने डिजिटल सेवाओं को अपनाने की रफ़्तार बढ़ाई और लाखों भारतीयों को डिजिटल फ़ाइनेंशियल सेवाओं से जोड़ा। लेकिन अब नए ग्राहकों को जोड़ने के साथ-साथ पुराने ग्राहकों को अपने साथ बनाए रखना सबसे अहम हो गया है।

स्थायी बिज़नेस अब सिर्फ़ डाउनलोड या एक बार के लेन-देन पर ध्यान देने के बजाय, रोज़मर्रा की फाइनेंशियल ज़रूरतों को पूरा करने पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। अब लोगों को बस कुछ वक्त के लिए कोई फ़ायदा देने के बजाय, ऐसे समाधान उपलब्ध कराने पर ज़ोर दिया जा रहा है जो ग्राहकों को उपयोगी, आसान और भरोसेमंद लगे और वे लगातार इस्तेमाल करते रहें। इस लिहाज से देखा जाए, तो एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर कई तरह की सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले फिनटेक कंपनियाँ आगे रहती हैं। उदाहरण के लिए, सोचिए कि कोई ग्राहक पैसे उधार लेने के लिए किसी ऐप का इस्तेमाल करता है। साथ ही, वह यूपीआई के माध्यम से भुगतान करके किसी थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर से कार इंश्योरेंस भी खरीद सकता है। इससे ग्राहक को सुविधा मिलती है और फिनटेक कंपनी को कमीशन, ब्रोकरेज वगैरह से अलग-अलग तरह की कमाई का मौका मिलता है। ऐसे में, बाज़ार के उतार-चढ़ाव को संभालना काफी आसान हो जाता है।

यह तरीका भारत में सभी लोगों को वित्तीय सेवाओं के दायरे में लाने की मुहिम के अनुरूप भी है। मार्च 2025 में समाप्त होने वाले वर्ष के लिए भारत का ‘फाइनेंशियल इन्क्लूजन इंडेक्स’ बढ़कर 67.0 पर पहुँच गया, जो पिछले साल मार्च में 64.2 था। इससे जाहिर है कि वित्तीय सेवाओं को लोगों तक पहुँचाने, उनके उपयोग, गुणवत्ता और आसानी से उपलब्धता में लगातार सुधार हो रहा है।

जैसे-जैसे फिनटेक का दायरा नए ग्राहकों और उन इलाकों तक फैल रहा है जहाँ बैंकिंग सेवाएँ कम हैं, लोगों का लंबे समय तक जुड़ाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वे इन कंपनियों पर कितना भरोसा करते हैं।

भरोसे से बढ़कर कुछ नहीं

लोग अपने पैसों का लेन-देन सिर्फ वहीं करते हैं जहाँ उन्हें भरोसा हो, और डिजिटल माध्यमों से आमने-सामने की बातचीत के बिना किसी प्लेटफॉर्म के जरिए लेन-देन में यह बात और भी ज्यादा मायने रखती है। फिनटेक कंपनियों के सिस्टम पर लोगों का भरोसा ही शायद उसे दूसरों से अलग और खास बनाता है। भरोसे की वजह से ही कंपनियां अपने ग्राहकों को लंबे समय तक जोड़े रख पाती हैं, लोग बार-बार उनकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, दूसरों को भी जोड़ते हैं, साझेदारियों को मजबूती मिलती है और नए ग्राहकों को जोड़ने की लंबी अवधि की लागत कम हो जाती है। आज के इस कड़े मुकाबले वाले बाजार में प्रोडक्ट्स की आसानी से नकल की जा सकती है, वहाँ लोगों का भरोसा जीतना बहुत मुश्किल है और एक बार भरोसा टूटने पर उसकी भरपाई करना उससे भी ज्यादा मुश्किल है। पारदर्शी कीमत, पारदर्शी, बिना झंझट के शिकायतों का समाधान और पर्सनल डेटा का सही इस्तेमाल करना ही शायद किसी फिनटेक की कामयाबी का सबसे बड़ा मंत्र है। हालांकि, यह भरोसा तभी बनता है जब कंपनी लगातार ग्राहकों को सबसे पहले रखे और हर दिन सुर्खियों में नहीं होने के बाद भी पूरी ईमानदारी से अपना काम करती रहे।

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी और उसे इस्तेमाल करने की जानकारी बढ़ रही है और फिनटेक कंपनियां लोगों और पैसों के लेन-देन से जुड़ रही हैं, इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि दोनों ही इस बात पर ज्यादा ध्यान देते हैं कि बिजनेस तेजी से नहीं, बल्कि कितनी स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है।

 

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