
इंदौर. खजराना थाने में पदस्थापना के दौरान विवेचना में गंभीर अनियमितताओं के मामले में पूर्व थाना प्रभारी दिनेश वर्मा पर कार्रवाई की गई है. विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद पुलिस कमिश्नर ने उनका पद घटाकर निरीक्षक से उपनिरीक्षक कर दिया है. जांच में सामने आया कि उनके कार्यकाल में बड़ी संख्या में आपराधिक प्रकरणों में सीमित लोगों को ही गवाह बनाया था.
दिनेश वर्मा 31 अगस्त 2020 से 2 अगस्त 2023 तक खजराना थाने में थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ रहे थे. विभागीय जांच के दौरान थाने के पुराने प्रकरणों की पड़ताल की गई तो विवेचना प्रक्रिया को लेकर कई सवाल सामने आए. जांच में पता चला कि उनके कार्यकाल में 742 मामलों में इरशाद पिता अब्दुल हकीम और 504 मामलों में नवीन पिता रामचंद्र चौहान को गवाह बनाया गया. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, धोखाधड़ी, कूटरचना, आबकारी और एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर अपराध भी शामिल थे. जांच अधिकारियों ने माना कि अलग अलग मामलों में एक ही तरह के गवाहों की लगातार मौजूदगी से विवेचना की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए. इसके बाद विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने पर कार्रवाई की गई. पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद दिनेश वर्मा को निरीक्षक पद से पदावनत कर उपनिरीक्षक बनाया है.
निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं…
विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है. पुलिसकर्मियों को विवेचना में नियमों का पालन करने और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं.
डीसीपी जोन 2 अमन सिंह राठौर
