जिस दिन भक्त भगवान का द्वार खोलता है,उसी दिन उसके भाग्य के द्वार भी खुल जाते हैं

दमोह/दमोह।बड़े बाबा मंदिर परिसर में आयोजित प्रवचन श्रृंखला धर्मसभा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने भगवान महावीर स्वामी की देशना का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि “ज्ञान समान न आन जगत में सुख को कारण।” उन्होंने कहा कि संसार की समस्त भौतिक सुविधाएँ क्षणिक सुख दे सकती हैं, किंतु वास्तविक और शाश्वत सुख केवल आत्मज्ञान से ही प्राप्त होता है। जो व्यक्ति अंतर्मुख होकर अपने आत्मस्वरूप की ओर दृष्टि करता है, वही सच्चा ज्ञानी और वास्तविक सुखी होता है।मुनिश्री ने कहा कि भगवान महावीर ने आत्मसुख की प्राप्ति के लिए राजवैभव, वैभवशाली साधनों और सांसारिक आसक्तियों का त्याग कर साधना, संयम और समता का मार्ग अपनाया। सच्चा सुख साधनों में नहीं, बल्कि साधना में निहित है। तप, त्याग और संयम साधक के लिए कष्ट नहीं, बल्कि आत्मकल्याण के श्रेष्ठ साधन हैं। समभाव और निस्पृहता से किया गया प्रत्येक आचरण आत्मा को परम शांति और आनंद की ओर ले जाता है।उन्होंने कहा कि “भावना भवनाशिनी भी है और भववर्धिनी भी।” मनुष्य के भाव ही उसके बंधन और मोक्ष का कारण बनते हैं। संसार का बंधन भी अपने ही भावों से होता है और उससे मुक्ति भी शुद्ध भाव, आत्मजागरण और पुरुषार्थ से ही संभव है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि बाहरी तीर्थों के साथ-साथ अपने अंतर्मन की निर्मल भाव-सरिता में भी अवगाहन करें। प्रभु के चरणों में निष्कपट समर्पण और आत्मचिंतन ही जीवन के दुःखों का वास्तविक समाधान है।

समवसरण की दिव्य महिमा का वर्णन करते हुए मुनिश्री ने कहा कि तीर्थंकर भगवान की देशना सभी जीवों के लिए समान रूप से उपलब्ध होती है। प्रत्येक श्रद्धालु को ऐसा अनुभव होता है मानो भगवान उसी की ओर मुख करके उपदेश दे रहे हों। उन्होंने कहा कि बड़े बाबा के दर्शन केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मजागरण का माध्यम हैं।

मुनिश्री ने कहा, “जिस दिन भक्त भगवान का द्वार खोलता है, उसी दिन उसके भाग्य के द्वार भी खुल जाते हैं।” उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे बड़े बाबा के प्रति निष्कपट श्रद्धा, समर्पण और आत्मभाव के साथ जुड़ें। यदि परिस्थितिवश तीर्थ से लौटना भी पड़े तो अपना मन प्रभुचरणों में ही छोड़कर जाएँ। प्रभु से भावनात्मक जुड़ाव ही निरंतर पुण्यार्जन, आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का आधार है।

राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं कुण्डलपुर तीर्थ के प्रचारमंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर निर्यापक मुनि श्री समतासागर महाराज के प्रेरणादायी प्रवचनों का लाभ लिया। उन्होंने बताया कि 9 अगस्त रविवार को दोपहर 1:00 बजे से चातुर्मास कलश स्थापना कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। कुण्डलपुर तीर्थक्षेत्र कमेटी ने भारतवर्ष के समस्त जैन श्रद्धालुओं एवं तीर्थ यात्रियों से आग्रह किया है कि वे इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में सपरिवार पधारें।

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