
जबलपुर। विदिशा जिले के गुलाबगंज तहसील के अंतर्गत आने वाले चार गांव के छात्र-छात्राएं बेतवा नदी में स्टॉप डेम के बनाये गये पिलरों पर कूदकर स्कूल जाते हैं। छात्र-छात्राएं स्कूल जाने के लिए रोजाना अपनी जान जोखिम में डालते है। इस संबंध में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल ने मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
दरअसल तस्वीर के साथ प्रकाशित खबर में कहा गया था कि विदिशा जिले के गुलाबगंज तहसील स्थित बेतवा नदी में स्टॉप डेम के लिए पिलरों का निर्माण कर दिया गया है। नदी में बने 9 पिलरों का उपयोग छात्र-छात्राएं स्कूल जाने के लिए करते है। छात्र.छात्राएं संतुलन बनाते हुए एक.एक पिलर को कूदकर नदी को पार करते हुए शासकीय हाईस्कूल पलोह जाते है। छात्रों को मजबूरन ऐसा इसलिए करना पड़ता है कि क्योंकि सडक़ मार्ग का रास्ता 10 से 15 किलोमीटर लंबा है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ तथा अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा को कोर्ट मित्र अधिवक्ता नियुक्त करते हुए उनसे नदी में पुल बनाने या स्टॉप डेम बनाकर आने जाने के लिए रास्ता बनाने जाने के संबंध में सुझाव मांगे है। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि स्टॉप डेम के दोनों तरफ बेरिकेटिग कर चौकीदार की नियुक्ति की गयी है। न्यायिक अधिकारियों की टीम के द्वारा भी निरीक्षण किया गया है। किरमची बंधेरा के माध्यमिक स्कूल को अपग्रेड कर हाई स्कूल में तब्दील करने का प्रस्ताव लोक शिक्षण संचालनालय को भेजा गया है। वर्तमान में उक्त स्कूल में अस्थाई तौर पर हाई स्कूल में तब्दील कर दो शिक्षकों को नियुक्त किया गया है। युगलपीठ ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि अस्थाई तौर पर बनाये गये स्कूल में दो शिक्षक सभी विषय कैसे पढ़ा सकते है। इससे विद्यार्थियों की पढाई प्रभावित होगी। युगलपीठ ने इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी करते हुए प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव और विदिशा कलेक्टर को नोटिस जारी करते हुए स्टे्टस रिपोर्ट के साथ जवाब प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये है। याचिका पर अगली सुनवाई 21 सितम्बर को निर्धारित की गयी है।
