भोपाल। पब्लिक ट्रांसपोर्ट लगातार मजबूत हो रहा है। मेट्रो और नई इलेक्ट्रिक बसों जैसी सुविधाओं से यात्रियों को सस्ता, तेज और आरामदायक सफर मिल रहा है। लेकिन दूसरी ओर शहर के ऑटो चालकों का कहना है कि इस बदलाव का असर उनकी कमाई पर साफ दिखाई देने लगा है।
ऑटो चालकों के मुताबिक, पहले के मुकाबले अब सवारियां काफी कम हो गई हैं। अधिकतर लोग कम किराए और बेहतर सुविधा की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे ऑटो में बैठने वाले यात्रियों की संख्या लगातार घट रही है।
चालकों का कहना है कि पहले दिनभर में अच्छी कमाई हो जाती थी, लेकिन अब पूरे दिन मेहनत करने के बाद भी सिर्फ 300 से 400 रुपये ही हाथ में बचते हैं। बढ़ती महंगाई, ईंधन और वाहन के रखरखाव के खर्च के बीच इतनी कम कमाई से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
हालांकि, यात्रियों के लिए बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन ऑटो चालकों का कहना है कि सरकार को उनके रोजगार और आजीविका पर पड़ रहे असर पर भी ध्यान देना चाहिए। ऐसे में सवाल यही है कि क्या बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ ऑटो चालकों के लिए भी कोई संतुलित समाधान निकाला जाएगा?
