
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई फिर टल गई, दरअसल सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अहम याचिका का मुद्दा सामने आया, जिसके बाद न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त तक के लिये मुल्तवी कर दी। जस्टिस विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने पक्षकारों की सहमति पर उक्त निर्देश दिये।
गौरतलब है कि भोपाल निवासी स्वाति तिवारी सहित अन्य की ओर से प्रमोशन में आरक्षण के संबंध में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि पूर्व में महाधिवक्ता ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया कि सरकार के द्वारा नये नियम के अनुसार पदोन्नति नही दी जायेगी। प्रदेश सरकार के द्वारा कर्मचारियों की प्रमोशन सूची जारी की गयी है। मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की लंबित याचिका का मुद्दा सामने आने से पहले सामान्य वर्ग की ओर से विस्तार से बहस हुई। कोर्ट को बताया गया कि कई विभागों में आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व पहले से पूरा है। इसके बाद भी प्रमोशन में आरक्षण दिया जा रहा है। इस पर आपत्ति दर्ज कराई गई। सामान्य वर्ग की ओर से यह दलील भी दी गई कि मेरिट के आधार पर चयनित आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को प्रमोशन के समय दोबारा पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल किया जा रहा है। उनका कहना था कि इससे प्रमोशन प्रक्रिया का संतुलन प्रभावित हो रहा है। इस मुद्दे को भी पक्षकारों ने कोर्ट के समक्ष रखा।
*जल्द सुनवाई के लिये सुकों में किया जायेगा आवेदन-*
कोर्ट ने कहा कि विरोधाभासी फैसलों से बचना जरुरी है। इसलिए राज्य सरकार और याचिकाकर्ता मिलकर सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त आवेदन लगाएंगे। इसमें मामले की जल्द सुनवाई की मांग की जाएगी। हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सभी पक्षों को आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट हो सकेगी। न्यायालय ने कहा कि पक्षकारों को कोर्ट को बताना होगा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लगाए जाने वाले आवेदनों में क्या प्रगति हुई है। इसके बाद मेरिट पर सुनवाई की अगली तारीख तय की जाएगी।
*जस्टिस ने खुद किया खुलासा, पक्षकारों ने कहा उन्हें कोई आपत्ति नहीं-*
मामले की सुनवाई दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल ने खुद ही बताया कि वह सीपी माथुर प्रकरण में कैट, हाईकोर्ट व सुको में बतौर एडवोकेट पैरवी कर चुके है। जिस पर राज्य सरकार व याचिकाकर्ताओं ने भी अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, उन्होंने न्याय पीठ पर भरोसा व्यक्त किया।
