नयी दिल्ली, 03 अगस्त (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने आखों का इलाज कराने के लिए विदेश जाने की मांगो लेकर पेश तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर कलकत्ता उच्च न्यायालय को सोमवार को एक सप्ताह के भीतर सुनवाई करने का निर्देश दिये। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आज यह आदेश दिये। श्री बनर्जी के वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि मामले की तात्कालिकता के बावजूद कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई में देरी हो रही है। सुनवाई की शुरुआत में श्री बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उनके मुवक्किल को इलाज के लिए विदेश जाने की तत्काल अनुमति की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई में देरी के कारण प्रशासनिक और चिकित्सीय कठिनाइयां हो रही हैं। पीठ ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने की आवश्यकता पर सवाल उठाया, जबकि उच्च न्यायालय पहले से ही मामले की सुनवाई कर रहा है और उसने इस मामले में कानूनी सुरक्षा प्रदान की थी। जवाब में श्री बनर्जी के वकील ने कहा कि आवेदन में एक तत्काल चिकित्सीय मुद्दा शामिल था और उच्च न्यायालय में बार-बार हो रही देरी के कारण शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने निर्देश दिया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय एक सप्ताह के भीतर मामले की सुनवाई करे और उस पर निर्णय ले। डीजे मामले की जांच में सहयोग करने के बावजूद, इलाज के लिए विदेश जाने की इजाज़त न मिलने पर श्री बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। उनकी याचिका के अनुसार, उन्होंने उच्च न्यायालय के सभी निर्देशों का पालन किया है, जिसमें अपना वॉयस सैंपल देना और जांच एजेंसी को पूरा सहयोग देना शामिल है, लेकिन विदेश में आंखों के इलाज की इजाज़त मांगने वाली उनकी अर्ज़ी अभी भी लंबित है।
इससे पहले, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस मामले की तत्काल सुनवाई की उनकी अपील ठुकरा दी थी, जबकि मुख्य याचिका भी लंबित थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य के सामने सुनवाई के दौरान श्री बनर्जी के वकील ने 20 जुलाई को बताया था कि डायमंड हार्बर के सांसद पिछले लगभग एक दशक से अमेरिका में अपनी आंखों का इलाज करवा रहे हैं और उन्हें वहां लगातार चिकित्सकीय देखभाल की ज़रूरत है। राज्य सरकार ने इस अपील का विरोध किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने तर्क दिया था कि श्री बनर्जी डीजे मामले समेत कई मामलों में शामिल हैं और उन्हें विदेश जाने की इजाज़त देने से चल रही जांच पर बुरा असर पड़ सकता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने श्री बनर्जी को पहले एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के प्रमुख से जांच करवाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा था कि अगर चिकित्सा विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचते हैं कि ज़रूरी इलाज कोलकाता में उपलब्ध नहीं है और विदेश में इलाज कराना चिकित्सकीय रूप से ज़रूरी है, तो विदेश यात्रा की अपील पर फैसला करते समय उस राय को उचित महत्व दिया जाएगा। उन्होने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा की इजाज़त पर विचार करते समय श्री बनर्जी की पिछली इलाज के इतिहास की बजाय उनकी मौजूदा मेडिकल स्थिति को मुख्य आधार माना जायेगा। अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद से कोलकाता लौटते समय एक सड़क दुर्घटना में श्री बनर्जी की आंख के नीचे गंभीर चोट लगी थी।देश में शुरुआती इलाज के बाद, उन्होंने विदेश में बेहतर इलाज करवाया और तब से वे विदेश में समय-समय पर मेडिकल सलाह लेते रहे हैं।

