मुंबई, 02 अगस्त (वार्ता) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने जुलाई में भारतीय पूंजी बाजार में 40,031 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया जो 22 महीने का उच्चतम स्तर है।
शुद्ध निवेश का मतलब है कि उनका निवेश इतना बढ़ा है। यह उनके द्वारा बाजार में लगायी गयी पूंजी और निकाली गयी पूंजी का अंतर होता है।
यह लगातार दूसरा महीना है जब एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजार में निवेश बढ़ाया है। जून में उनका शुद्ध निवेश 4,669 करोड़ रुपये रहा था। साथ ही सितंबर 2024 के बाद पहली बार एफपीआई ने 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लिवाली की है।
खास बात यह रही कि एफपीआई ने हर सिग्मेंट में पैसा लगाया है जो भारतीय बाजार के प्रति उनके विश्वास के दिखाता है।
इक्विटी में उनका निवेश 20,200 करोड़ रुपये बढ़ा। डेट में उन्होंने शुद्ध रूप से 18,660 करोड़ रुपये और हाइब्रिड उपकरणों में 166 करोड़ रुपये लगाये। म्यूचुअल फंड में उनका निवेश 1,001 करोड़ रुपये रहा।
मौजूदा कैलेंडर वर्ष के सात में से तीन महीने एफपीआई ने बाजार में पैसा लगाया है। पश्चिम एशिया संकट के बाद मार्च, अप्रैल और मई में एफपीआई का निवेश कुल मिलाकर 2.26 करोड़ रुपये कम हुआ था।
इस कैलेंडर वर्ष में अब तक एफपीआई ने 1,72,842 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है। इसमें अकेले इक्विटी से उन्होंने 2,54,073 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है।
