पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी एन शर्मा को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गयी

नयी दिल्ली 01 अगस्त (वार्ता) पूर्व सेना प्रमुख जनरल विश्व नाथ शर्मा का शनिवार को यहां बरार स्क्वायर श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जनरल शर्मा का शुक्रवार सुबह 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सेना के सभी रैंकों की ओर से उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। मिजोरम के राज्यपाल और पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने भी दिवंगत सैन्य अधिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा अंतिम संस्कार में शामिल हुए। अंतिम संस्कार समारोह में पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष , पूर्व सेना प्रमुख, वायु सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख, सेवारत और सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक और परिवार के सदस्य शामिल हुए। जनरल शर्मा का जन्म 04 जून 1930 को लंदन में हुआ था। वह मेजर सोमनाथ शर्मा (भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता) और लेफ्टिनेंट जनरल सुरेंद्र नाथ शर्मा (भारतीय सेना के पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ) के छोटे भाई थे। वह 5वें रेगुलर कोर्स के हिस्से के रूप में देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में शामिल हुए और 04 जून 1950 को 16 लाइट कैवेलरी में कमीशन प्राप्त किया। एक सितंबर 1966 को वह 66 आर्मर्ड रेजिमेंट के गठन के समय वह सेकंड-इन-कमांड के रूप में इसमें शामिल हुए और जून 1968 में रेजिमेंट के दूसरे कमांडेंट के रूप में कमान संभाली।

अपने करियर के दौरान, जनरल शर्मा ने कई स्टाफ पदों पर कार्य किया, जिनमें आर्मर्ड डिवीजन के कर्नल जनरल स्टाफ, कोर के ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ, सेना मुख्यालय में सैन्य संचालन महानिदेशक और महू स्थित कॉलेज ऑफ कॉम्बैट (अब आर्मी वॉर कॉलेज) के कमांडेंट के पद शामिल हैं। 30 अप्रैल 1988 से 30 जून 1990 तक सेना प्रमुख का पद संभालने से पहले, उन्होंने मिज़ोरम में माउंटेन ब्रिगेड, जयपुर में आर्मर्ड ब्रिगेड, सिक्किम में माउंटेन डिवीज़न, मिज़ोरम में एक कोर और कोलकाता में पूर्वी कमान की बागडोर संभाली थी। अपने करियर के दौरान जनरल शर्मा को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। सेवानिवृत होने के बाद अपने पिता और ससुर की समाज-सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, जनरल शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में तपेदिक के एक मुफ़्त क्लिनिक के ज़रिए ज़रूरतमंद समुदायों की सेवा में चार दशक बिताये। अपनी मेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस से दूर-दराज़ के गांवों तक और अक्सर ऊंचाई पर बसे इलाकों में पैदल जाकर, उन्होंने उन लोगों तक ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचायी जिनकी पहुंच मेडिकल सुविधाओं तक सीमित थी। सेवा-भाव के प्रति उनके अटूट समर्पण ने परिवार की आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया और उनके बेटे तथा परिवार के अन्य सदस्य जन-सेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। देश के प्रति जनरल शर्मा का शानदार सेवा-भाव, साहस और समर्पण सैनिकों की पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

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